Categories लोड हो रही हैं...

बोरावड़ से रींगस भैरूजी पैदल यात्रा, विश्व कल्याण संदेश

बोरावड़ से रींगस भैरूजी तक निकली पैदल यात्रा में श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया, भजन संध्या और स्वागत आयोजन हुए।

लक्ष्मण सिंह मैढ़7 April 2026
बोरावड़ से रींगस भैरूजी पैदल यात्रा, विश्व कल्याण संदेश

बोरावड़ के मेघवाल मोहल्ला स्थित मसानिया भैरव धाम से रींगस भैरूजी महाराज के लिए हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी दुर्गादास जी महाराज अपने शिष्यों के साथ पैदल यात्रा पर रवाना हुए। इस अवसर पर हनुमान आशोपिया, पूर्व पार्षद रामस्वरूप गोरा, मुन्नालाल पार्षद, ताराचंद मलिंडा, संजय सानेल, बद्री प्रसाद, हनुमान पिपरालिया, मनोज राजोरा, दीनदयाल राठौड़ सहित ग्रामीणों ने साफा व माला पहनाकर भव्य स्वागत किया।

ध्वज पताका लहराते हुए यात्रा को रवाना किया गया। डीजे की धुन और भैरव नाथ की शोभायात्रा के साथ मातृशक्ति ने भक्ति संगीत पर नृत्य कर उत्साह व्यक्त किया। यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। इस अवसर पर विशाल भजन संध्या का आयोजन भी हुआ, जिसमें कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दुर्गा महाराज ने बताया कि यह यात्रा विश्व कल्याण, प्रेम, भाईचारे और देश के विकास की मंगल कामना के साथ निकाली जा रही है। उन्होंने बताया कि सीकर जिले के रींगस कस्बे में स्थित भैरू बाबा का मंदिर लगभग 550 वर्ष पुराना है और देशभर में प्रसिद्ध है।

मान्यता के अनुसार कालाष्टमी के दिन भैरव बाबा की आकाशवाणी हुई थी, जिसके बाद इस स्थान पर उनका स्थायी निवास हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने अपने पांचवें रुद्र अवतार में भैरव रूप धारण कर ब्रह्मा जी के पांचवें मुख को अलग किया था, जिससे उन्हें ब्रह्म हत्या का दोष लगा। इस दोष से मुक्ति पाने के लिए भैरव बाबा ने तीनों लोकों की यात्रा की, जिसकी शुरुआत पृथ्वी लोक पर रींगस से मानी जाती है।

दुर्गा महाराज ने बताया कि मंदिर के पुजारी गुर्जर समाज से हैं, जिनके पूर्वज गाय चराते हुए भैरव बाबा की पत्थर की मूर्ति साथ रखते थे। मंडोर से चलते हुए जब वे रींगस पहुंचे तो मूर्ति वहीं स्थिर हो गई और आकाशवाणी हुई कि यही उनका निवास स्थान है। इसके बाद वहीं मंदिर की स्थापना की गई।

मंदिर का तीसरी बार जीर्णोद्धार वर्ष 2013 में शुरू हुआ। पहले मंदिर के चारों ओर श्मशान क्षेत्र था और मूर्ति खुली अवस्था में थी, लेकिन अब चारदीवारी के भीतर सुरक्षित है। मंदिर के बाहर सती माता की छतरी भी बनी हुई है, जिस पर 1669 ईस्वी अंकित है, जो इसके प्राचीन होने का प्रमाण है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी यानी कालाष्टमी पर भैरव बाबा की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु पुआ-पापड़ी, बाटी-बाकला, लौंग-पतासे आदि का भोग लगाते हैं। वर्ष भर में चैत्र, वैशाख, भाद्रपद, आश्विन और माघ मास में यहां भव्य मेले भी आयोजित होते हैं।

News Detail Ad 1
Ad1
Ad2
News Detail Ad 1
Ad1
Ad2

सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें
राजनीति की हर हलचल, क्रिकेट और स्पोर्ट्स की हर अपडेट, और देश-दुनिया की बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए eNews Bharat के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ना न भूलें।

Instagram: https://www.instagram.com/enewsrajasthan
Facebook: https://www.facebook.com/RajasthaneNews
YouTube (Subscribe): https://www.youtube.com/@eNewsBharat24
X (Twitter): https://x.com/eNewsRajasthan

यहां आपको मिलेंगे लाइव अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज़, शॉर्ट वीडियो, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, मैच प्रीव्यू और रिव्यू। eNewsBharat के साथ जुड़े रहें देश-विदेश की बड़ी राजनीतिक घटनाएँ, जीएसटी फ्रॉड से जुड़ी अहम जानकारियाँ, स्पोर्ट्स और जनहित से जुड़ी हर ज़रूरी खबर — पल-पल की सटीक जानकारी के लिए eNewsBharat को लगातार विज़िट करते रहें। आपका भरोसा ही हमारी ताकत है। हम आगे भी आपको सबसे तेज़, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबरें पहुँचाते रहेंगे।

#बोरावड़ #रींगस #भैरूजी #भैरवबाबा #पैदलयात्रा #राजस्थानसमाचार #धार्मिकयात्रा #भजनसंध्या #कालाष्टमी #मकराना #सीकर #eNewsBharat