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सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स मामले की आखिरी याचिका खारिज, विवाद समाप्त

सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स तोप सौदा मामले की आखिरी याचिका खारिज कर दी। 40 साल पुराने विवाद का कानूनी अंत हुआ, 2005 का बरी फैसला बरकरार।

eNews Bharat7 August 2026
सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स मामले की आखिरी याचिका खारिज, विवाद समाप्त

सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के दिल्ली हाईकोर्ट फैसले को चुनौती देने वाली अंतिम याचिका खारिज कर बोफोर्स तोप सौदा मामले पर कानूनी विराम लगा दिया, लगभग 40 साल पुराने विवाद का अध्याय हमेशा के लिए बंद हुआ।

नई दिल्ली। देश के सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बोफोर्स तोप सौदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाते हुए 2005 के दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ दायर आखिरी याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही करीब 40 वर्षों से चल रहे बोफोर्स विवाद का कानूनी अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जब सभी आपराधिक कार्यवाहियां पहले ही समाप्त हो चुकी हैं, तब इस मामले को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने कहा कि यह 2018 से लंबित मामला है और इसे और टालने का कोई कारण नहीं बनता।

किसने दायर की थी याचिका?

बीजेपी नेता और अधिवक्ता अजय के. अग्रवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के 2005 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान उन्होंने दो दिवंगत प्रतिवादियों—श्रीचंद पी. हिंदूजा और गोपीचंद पी. हिंदूजा—का नाम हटाने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग स्वीकार नहीं की और याचिका खारिज कर दी।

2005 का फैसला बरकरार

31 मई 2005 को दिल्ली हाई कोर्ट ने हिंदूजा बंधुओं और स्वीडिश कंपनी एबी बोफोर्स के खिलाफ सभी आरोप रद्द कर दिए थे। उस समय अदालत ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस मामले में सरकारी खजाने के लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकल सके।

2018 में भी सीबीआई की अपील खारिज हुई थी

इससे पहले नवंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील भी खारिज कर दी थी। सीबीआई ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने में 4,522 दिनों की देरी की थी और अदालत को इस देरी का संतोषजनक कारण नहीं बता सकी थी।

क्या था बोफोर्स घोटाला?

24 मार्च 1986 को भारत सरकार और स्वीडिश कंपनी एबी बोफोर्स के बीच 1,437 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। इस डील के तहत भारतीय सेना के लिए 400 हॉवित्जर (155 मिमी) तोपों की खरीद की जानी थी।

अप्रैल 1987 में स्वीडिश रेडियो की एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इस सौदे को हासिल करने के लिए भारतीय राजनेताओं और रक्षा अधिकारियों को अवैध कमीशन दिया गया था। इसके बाद यह मामला देश के सबसे बड़े राजनीतिक घोटालों में शामिल हो गया।

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सीबीआई जांच और चार्जशीट

जनवरी 1990 में सीबीआई ने पूर्व बोफोर्स अध्यक्ष मार्टिन अर्दबो, कथित बिचौलिए विन चड्ढा और हिंदूजा बंधुओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। बाद में इतालवी कारोबारी ओत्तावियो क्वात्रोची समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। अक्टूबर 2000 में हिंदूजा बंधुओं का नाम पूरक चार्जशीट में शामिल किया गया।

समय के साथ कमजोर पड़ता गया मामला

फरवरी 2004 में दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को इस मामले में आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था। इसके बाद 2011 में ओत्तावियो क्वात्रोची को भी ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया। 2013 में उसकी मृत्यु हो गई। वहीं मुकदमे के दौरान विन चड्ढा, मार्टिन अर्दबो और पूर्व रक्षा सचिव एस.के. भटनागर का भी निधन हो चुका है।

अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा आखिरी याचिका खारिज किए जाने के साथ ही बोफोर्स मामले में सभी न्यायिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और लगभग चार दशक पुराने इस विवाद का कानूनी रूप से समापन हो गया है।


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