आठ महीने की मेहनत बेकार, अजनार नदी में फिर जमा कचरा
कहते हैं कि किसी चीज को बिगाड़ने में कुछ पल लगते हैं, लेकिन उसे संवारने में महीनों की मेहनत लग जाती है। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की अजनार नदी का हाल देखकर कुछ ऐसा ही सवाल उठ रहा है। जिस नदी को साफ करने के लिए बिट्टू तबाही ने करीब आठ महीने तक मेहनत की, वहां एक बार फिर प्लास्टिक की थैलियां और दूसरे तरह का कचरा जमा हो गया।
नदी की यह हालत देखकर बिट्टू तबाही भी निराश नजर आए। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपनी परेशानी जाहिर की। लेकिन खास बात यह रही कि नदी को दोबारा गंदा देखकर उन्होंने सफाई का काम छोड़ने के बजाय फिर से कचरा निकालना शुरू कर दिया।
कौन हैं बिट्टू तबाही?
बिट्टू तबाही का असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है। वह पर्यावरण संरक्षण और नदियों की सफाई के प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं। अजनार नदी की सफाई के दौरान उन्होंने बिना बड़े उपकरणों के लंबे समय तक मेहनत की और नदी से बड़ी मात्रा में कचरा निकाला।
उनकी कोशिशों का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया था। लोगों ने उनके काम की सराहना की और नदी को साफ रखने की जरूरत पर बात की। लेकिन अब नदी के किनारों पर दोबारा कचरा दिखाई देने से एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि सफाई करने के बाद भी सार्वजनिक जलस्रोतों में गंदगी क्यों जमा हो जाती है।
खुद की मेहनत से साफ की नदी, फिर लौट आई गंदगी
अजनार नदी की सफाई में बिट्टू ने करीब आठ महीने लगाए। इस दौरान उन्होंने नदी और उसके आसपास जमा कचरे को हटाने का काम किया। इतने लंबे प्रयास के बाद जब नदी के किनारों पर फिर से प्लास्टिक और दूसरे कचरे का ढेर नजर आया, तो उनकी निराशा सामने आई।
बिट्टू ने अपने वीडियो के साथ साझा किए गए संदेश में कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि आठ महीने की मेहनत इस तरह बेकार हो जाएगी। उनकी परेशानी समझी जा सकती है, क्योंकि सफाई में लंबा समय और मेहनत लगती है, जबकि दोबारा कचरा जमा होने से पूरी जगह फिर गंदी हो सकती है।
निराश हुए, लेकिन हार नहीं मानी
नदी की हालत देखकर निराश होने के बावजूद बिट्टू ने सफाई का प्रयास जारी रखा। उन्होंने फिर से कचरा हटाना शुरू किया और सोशल मीडिया पर लोगों से सुझाव भी मांगे कि नदी से अधिक मात्रा में कचरा किस तरह निकाला जा सकता है।
उनकी कोशिश यह दिखाती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार काम करना जरूरी है।



