विकास के दावों के बीच बाड़मेर जिले की गड़स पंचायत का बिजाबा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। वर्ष 1971 में पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए 55 परिवारों ने इस गांव को बसाया था, लेकिन 55 वर्ष बीत जाने के बावजूद यहां के लोगों को बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हो सकी हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में आज तक बिजली, पक्की सड़क, शुद्ध पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और मोबाइल नेटवर्क जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में गांव के लोगों को पानी के लिए कई किलोमीटर दूर स्थित कुओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन पानी लाने में काफी समय और मेहनत लगती है, जिससे उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि बिजली की लाइन गांव से महज चार किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद आज तक बिजाबा गांव तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। बिजली के अभाव में ग्रामीण अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं, वहीं बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को गांव की समस्याओं से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोगों को उपचार के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता है, जबकि शिक्षा व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं होने से बच्चों के भविष्य पर असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि दशकों से उपेक्षा का सामना कर रहे लोगों को राहत मिल सके।
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई यह स्थिति विकास के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। अब लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी है कि आखिर बिजाबा गांव की समस्याओं का समाधान कब तक किया जाएगा।




