बिहार से देशभर तक MBBS सीटों का NRI कोटा नेटवर्क
बिहार से शुरू हुआ MBBS सीटों की कथित खरीद-फरोख्त का नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला होने का दावा सामने आया है। दैनिक भास्कर की अंडरकवर जांच में ऐसे एजेंट्स से संपर्क किया गया, जो कम NEET स्कोर वाले छात्रों को भी NRI कोटे के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने का दावा कर रहे थे।
जांच में बिहार के अलग-अलग शहरों में सक्रिय एजेंट्स के जरिए राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचने की बात सामने आई। एजेंट्स ने NRI कोटे के नाम पर बड़ी रकम लेने और दस्तावेज तैयार कराने की पेशकश की।
नेटवर्क मार्केटिंग पैटर्न की तरह काम करने का दावा
जांच के दौरान सामने आया कि एजेंट्स का नेटवर्क एक-दूसरे से जुड़ा हुआ था। एक एजेंट से बातचीत के बाद दूसरे एजेंट का संपर्क दिया गया और इस तरह कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में संपर्क किए गए कुछ एजेंट्स ने देश के अलग-अलग राज्यों में मेडिकल कॉलेजों में दाखिला कराने का दावा किया। एजेंट्स के बीच कमीशन और संपर्क के आधार पर काम बांटे जाने की बात भी सामने आई।
NRI कोटे से सीट दिलाने का दावा
अंडरकवर रिपोर्टर्स ने कम NEET स्कोर वाले अभ्यर्थियों के रूप में एजेंट्स से संपर्क किया। जांच के दौरान कुछ एजेंट्स ने दावा किया कि सामान्य मेरिट से सीट मिलने की संभावना कम होने के बावजूद NRI कोटे के रास्ते MBBS में दाखिला कराया जा सकता है।
एक एजेंट ने राजस्थान में NRI कोटे के जरिए दाखिले का दावा किया और इसके लिए अलग-अलग मदों में रकम मांगे जाने की बात सामने आई। एजेंट ने NRI प्रायोजक की व्यवस्था करने का भी दावा किया।
करोड़ों रुपये के लेनदेन के संकेत
जांच में कुछ मामलों में MBBS सीट के लिए एक करोड़ रुपये या उससे अधिक रकम की मांग किए जाने का दावा सामने आया। कुछ डील में रकम अलग-अलग किश्तों में लेने की बात भी कही गई।
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के एक एजेंट से बातचीत में NRI दस्तावेजों और दाखिले के लिए बड़ी रकम का जिक्र हुआ। एक अन्य मामले में कॉलेज से जुड़ी प्रक्रिया के नाम पर एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि का उल्लेख सामने आया।
हालांकि, एजेंट्स द्वारा किए गए इन दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना जरूरी है। किसी कॉलेज या व्यक्ति की संलिप्तता को केवल अंडरकवर बातचीत के आधार पर अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए दाखिले का आरोप
जांच में NRI कोटे के लिए दस्तावेज तैयार कराने और विदेशी प्रायोजक उपलब्ध कराने के दावे भी सामने आए। कुछ एजेंट्स ने ऐसे दस्तावेज तैयार कराने की बात कही, जिन्हें वे मूल और सत्यापन योग्य बताते थे।
NRI कोटे में दाखिले के लिए पात्रता और दस्तावेजों की वैधता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल होता है तो यह गंभीर कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े करता है।
पहले भी फर्जी NRI दस्तावेजों के जरिए मेडिकल दाखिलों से जुड़े मामलों में जांच सामने आ चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय की एक जांच में करीब 18 हजार MBBS और पीजी दाखिलों में फर्जी NRI दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आने की रिपोर्ट हुई थी।
कॉलेज और एजेंट्स के बीच कथित कनेक्शन
जांच के दौरान एजेंट्स ने कई मेडिकल कॉलेजों से संपर्क होने का दावा किया। कुछ एजेंट्स ने यह भी कहा कि उनके संपर्क के कारण वे उम्मीदवारों को अलग-अलग राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिला सकते हैं।
दैनिक भास्कर की जांच में अंडरकवर रिपोर्टर्स ने एजेंट्स से मिली जानकारी के आधार पर कुछ मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचने की कोशिश की। वहां दाखिले से जुड़ी बातचीत और कथित रकम की जानकारी जुटाई गई।
इस तरह की जांच में सामने आए दावों की पुष्टि संबंधित मेडिकल कॉलेजों, काउंसलिंग अधिकारियों और नियामक संस्थाओं के रिकॉर्ड से होना जरूरी है।



