भोपाल में बारिश के बीच चार वायरस एक्टिव, फेफड़े, आंख, दिमाग और दिल तक पहुंच सकता है संक्रमण
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार हो रही बारिश के साथ वायरल संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस बार सामान्य वायरल फीवर के पीछे केवल मौसम में बदलाव ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि राइनो वायरस, एडेनो वायरस, एंटरो वायरस और इन्फ्लुएंजा वायरस जैसे चार प्रमुख वायरस एक साथ सक्रिय हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे होने के कारण लोग अक्सर इन्हें हल्के में ले लेते हैं। लेकिन समय पर इलाज और जांच न होने पर यही संक्रमण फेफड़ों, आंखों, आंतों, दिमाग और दिल तक पहुंचकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश का मौसम वायरस के फैलने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नमी अधिक रहती है, जिससे वायरस लंबे समय तक सक्रिय बने रहते हैं और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक तेजी से फैलते हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में इन दिनों बुखार, गले में दर्द, लगातार खांसी, नाक बहना, छींक आना, आंखों में संक्रमण और दस्त जैसी शिकायतों के साथ मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज करना कई बार भारी पड़ सकता है।
राइनो वायरस सामान्य सर्दी-जुकाम का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। इसके संक्रमण से नाक बहना, छींक आना, गले में खराश, हल्का बुखार और लगातार खांसी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि स्वस्थ व्यक्ति कुछ दिनों में ठीक हो सकता है, लेकिन अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीजों में यह वायरस सांस लेने में गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है। कई मामलों में मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की भी जरूरत पड़ सकती है।
वहीं एडेनो वायरस बच्चों और बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक माना जाता है। इसके कारण तेज बुखार, गले में संक्रमण, आंख आना (कंजंक्टिवाइटिस), निमोनिया और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में यह संक्रमण तेजी से फैलकर गंभीर रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आंखों में लालपन, तेज बुखार और लगातार कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
एंटरो वायरस शरीर के श्वसन और पाचन तंत्र दोनों को प्रभावित करता है। इससे हैंड-फुट-एंड-माउथ डिजीज, दस्त, उल्टी और वायरल मेनिन्जाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। दुर्लभ मामलों में यह वायरस मस्तिष्क और हृदय में सूजन का कारण भी बन सकता है। डॉक्टरों के अनुसार छोटे बच्चों में इसके संक्रमण का खतरा अधिक रहता है, इसलिए माता-पिता को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है।
इसके अलावा इन्फ्लुएंजा वायरस भी इस मौसम में तेजी से फैल रहा है। यह सामान्य फ्लू की तरह शुरू होता है, लेकिन कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में गंभीर निमोनिया और श्वसन संबंधी जटिलताएं पैदा कर सकता है। कई बार मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट की भी आवश्यकता पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुखार लगातार बना रहे और सांस लेने में दिक्कत बढ़ने लगे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मधुमेह, हृदय, फेफड़े या किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीज और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग इन चारों वायरस के सबसे अधिक जोखिम में हैं। ऐसे लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए और संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।




