मांगरोल तहसील क्षेत्र के ग्राम भटवाडा में चल रही संगीतमय श्री मद भागवत महापुराण की कथा का द्वितीय दिवस संपन्न हुआ। इस दिन कथा में राजा परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद के माध्यम से श्री मद भागवत महापुराण का महात्म्य, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की महिमा प्रस्तुत की गई। साथ ही शुकदेव जी के जन्म वृतांत का विस्तृत वर्णन भी किया गया।
कथा वाचक प्रमोद शास्त्री ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि ईश्वर की भक्ति में आडंबर नहीं होना चाहिए। सच्चे मन से की गई भक्ति ही सर्वोत्तम है।
कथा में गंगा जी की महिमा बताते हुए कहा गया कि गंगा मैया के जयकारे करने से अन्न-धन की कमी नहीं होती। दान-पुण्य और अन्य धार्मिक कार्य जो गंगा के तट पर किए जाएँ, वे अधिक फलदायी होते हैं। कलयुग में भगवान का नाम ही सबसे बड़ा आधार है।
कथा आयोजनकर्ता कोशल किशोर शर्मा और सप्तनिक सहित परिवार जनों ने कथा पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं के साथ मिलकर आरती की और प्रसाद वितरण किया।
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