मांगरोल भटवाड़ा गाँव स्थित मूंडया गणेश मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां भगवान गणेश के धड़ की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहां के गणेश जी का सिर रणथंभौर में ले जाकर स्थापित किया गया, जिसके कारण इन्हें मूंडया गणेश जी कहा जाता है।
सेवा पूजा करने वाले कौशल और ललित शर्मा के अनुसार, एक किवदंती के मुताबिक वर्ष 1761 में भटवाड़ा के गणेश चौक में जयपुर और कोटा रियासत के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें कोटा ने विजय प्राप्त की थी। इसके बाद जयपुर की सेना मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा का सिर काटकर अपने साथ ले गई और रणथंभौर दुर्ग में स्थापित कर दिया, तब से यहां केवल धड़ की पूजा होती है।
इस मंदिर में मांगरोल तहसील सहित कोटा संभाग और मध्यप्रदेश से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले यहां गणेश जी को प्रथम निमंत्रण दिया जाता है।
यहां से पत्थर के टुकड़े को गणेश प्रतीक के रूप में कामी सिंदूर लगाकर घरों में रखा जाता है। किसान कृषि कार्य शुरू करने से पहले यहां पूजा कर बीज में इस प्रतीक को मिलाकर खेत में बोते हैं।
भटवाड़ा में वर्ष में दो बार मेले का आयोजन होता है—नववर्ष (1 जनवरी) और गणेश चतुर्थी पर, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। प्रत्येक बुधवार को भी दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है।
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