भारत टैक्सी सस्ती, लेकिन ड्राइवरों के सामने कमाई का सवाल
ओला और उबर के बीच अब भारत टैक्सी भी कैब सर्विस के बाजार में अपनी जगह बना रही है। यूपी में सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को इसका किराया कई जगह निजी कैब कंपनियों के मुकाबले कम मिल रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ रूट पर भारत टैक्सी करीब 11% तक सस्ती पड़ रही है।
यात्रियों के लिए कम किराया राहत की बात है, लेकिन दूसरी तरफ कुछ ड्राइवरों ने अपनी कमाई और रोजमर्रा के खर्च को लेकर चिंता जताई है।
यूपी के 5 शहरों से शुरुआत
रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में भारत टैक्सी की शुरुआत लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर और वाराणसी से हुई है। आगे इसे प्रदेश के दूसरे जिलों तक विस्तार देने की योजना बताई गई है।
इससे पहले भारत टैक्सी की सेवाएं देश के दूसरे हिस्सों में भी शुरू की जा चुकी हैं। यह प्लेटफॉर्म सहकारी मॉडल पर आधारित है और इसका उद्देश्य ड्राइवरों को सिर्फ सेवा प्रदाता के बजाय सहकारी व्यवस्था में हिस्सेदार बनाना है।
यात्रियों को क्यों पसंद आ रही भारत टैक्सी?
भारत टैक्सी का सबसे बड़ा आकर्षण कम और पारदर्शी किराया बताया जा रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार इसका मॉडल ड्राइवर-केंद्रित होने के साथ यात्रियों को किफायती परिवहन उपलब्ध कराने पर भी जोर देता है।
इसके अलावा प्लेटफॉर्म में जीरो-कमीशन मॉडल की व्यवस्था बताई गई है। यानी राइड की कमाई में से सामान्य एग्रीगेटर कमीशन काटने के बजाय ड्राइवर को उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा सीधे मिलने का मॉडल रखा गया है।
ड्राइवर बोले- सिर्फ किराया कम होने से खर्च नहीं चलता
रिपोर्ट में कुछ कैब ड्राइवरों ने बताया कि कम किराए के कारण एक किलोमीटर पर बचने वाली रकम सीमित रह जाती है। एक ड्राइवर के मुताबिक गाड़ी का ईंधन खर्च करीब साढ़े 5 रुपए प्रति किलोमीटर है, जबकि कई राइड में मिलने वाला किराया 10 से 11 रुपए प्रति किलोमीटर के आसपास है।
ऐसे में ईंधन निकालने के बाद बची रकम से गाड़ी की किस्त, सर्विस, टायर और दूसरे खर्च पूरे करने पड़ते हैं। ड्राइवरों का सवाल है कि इन सभी खर्चों के बाद परिवार चलाने के लिए पर्याप्त कमाई कैसे होगी।
रोज का सब्सक्रिप्शन भी ड्राइवरों के लिए मुद्दा
रिपोर्ट के अनुसार भारत टैक्सी से जुड़े कुछ ड्राइवर रोजाना लिए जाने वाले सब्सक्रिप्शन शुल्क को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर राइड का किराया कम है और साथ में रोज के तय खर्च भी हैं, तो कुल कमाई पर इसका असर पड़ता है।
हालांकि भारत टैक्सी का आधिकारिक मॉडल यह दावा करता है कि ड्राइवरों से राइड पर कमीशन नहीं लिया जाता और सहकारी व्यवस्था के जरिए उन्हें आर्थिक लाभ में हिस्सेदारी मिल सकती है।



