भटवाड़ा गांव में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिवस बुधवार को कथा वाचक प्रमोद शास्त्री ने रूकमणी विवाह एवं सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि कथा को सुनने और समझने के लिए परमात्मा के प्रति गहरी श्रद्धा, सत्संग और ईश्वर के प्रति असीम प्रेम आवश्यक है। जिसकी श्रद्धा जितनी गहरी होती है, उसे उतनी ही प्रभु कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रेमपूर्वक हरि नाम जपने का आह्वान किया।
रूकमणी विवाह प्रसंग में बताया कि देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप और सौंदर्य की प्रशंसा सुनकर रूकमणी ने मन ही मन उनसे विवाह करने का संकल्प लिया। हालांकि उसके भाई इस निर्णय से सहमत नहीं थे और वह उसका विवाह चेदिनरेश के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहते थे।
कृष्ण-सुदामा प्रसंग में उन्होंने सच्ची मित्रता का महत्व बताते हुए कहा कि सच्चा मित्र वही होता है, जो बिना कहे अपने मित्र की परेशानी समझकर उसकी सहायता करे। आज के समय में स्वार्थ आधारित मित्रता अधिक देखने को मिलती है, जो स्वार्थ पूरा होते ही समाप्त हो जाती है।
कथा समापन के बाद आयोजनकर्ता कोशल शर्मा, ललित शर्मा, कपिल शर्मा, राजेश शर्मा एवं उनके परिवारजनों ने आरती कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया।
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