टोडारायसिंह उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मान्दोलाई के गांव खेजड़ों का बास इन दिनों भक्ति और आध्यात्म के रंग में रंगा हुआ है। यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं गीता पाठ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा पंडाल “जय श्री कृष्ण” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक श्रीमद्भागवत रसिक संत श्रद्धेय अवधेश दास जी महाराज ने कथा के माध्यम से राजा परीक्षित और महर्षि शुकदेव जी का अत्यंत प्रेरणादायक प्रसंग विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटी सी भूल ने राजा परीक्षित के जीवन को बदल दिया, जब उन्होंने अनजाने में शमीक ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया।
इस घटना से क्रोधित होकर ऋषि के पुत्र श्रृंगी ऋषि ने राजा परीक्षित को सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का श्राप दे दिया। महाराज श्री ने बताया कि श्राप मिलने के बाद भी राजा परीक्षित विचलित नहीं हुए, बल्कि उन्होंने इसे ईश्वर की इच्छा मानकर सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने राज-पाट त्यागकर गंगा तट का रुख किया और भगवान की भक्ति में लीन हो गए।
कथावाचक ने कहा कि जीवन के अंतिम सात दिनों में महर्षि शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा का अमृत सुनाया। इस दिव्य कथा श्रवण के प्रभाव से उनके मन से मृत्यु का भय पूरी तरह समाप्त हो गया और उन्होंने मोक्ष का मार्ग प्राप्त किया।
इस प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया। कथा के दौरान भक्ति का ऐसा वातावरण बना कि लोग भावविभोर हो उठे और भगवान के नाम का संकीर्तन करते नजर आए।
आयोजन समिति के सदस्य रणजीत सिंह, डॉ. जगवीर सिंह, डॉ. राजवीर सिंह, भानुप्रताप सिंह और अंशु सिंह ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की। अमर-विलास में चल रहा यह धार्मिक आयोजन आगामी दिनों में भी श्रद्धालुओं को भक्ति और ज्ञान से जोड़ता रहेगा।




