गौसेवा में बेटियों की मिसाल, गौशालाओं को दिए ₹3.59 लाख
भारतीय संस्कृति में गौसेवा को सर्वोच्च पुण्य कार्य माना गया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री सेवादास राजपुरोहित की सातों गांवों—बरवाला, रूपपुरा, रामपुरा, नौसर, वीदियाद, सूथली, भरनाई एवं कूकडोद की बहन-बेटियों ने गौमाता की सेवा एवं धार्मिक कार्यों के लिए कुल ₹3 लाख 59 हजार की सहयोग राशि भेंट कर प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
सप्त दिवसीय बहन-बेटी-सखी स्नेह मिलन एवं भागवत कथा के सफल आयोजन के पश्चात बची हुई राशि का सदुपयोग करते हुए विभिन्न गौशालाओं एवं धार्मिक कार्यों हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। इसके तहत श्री राम गौशाला रामपुरा (भरनाई), माँ करणी गौ सेवा समिति कूकडोद, श्री गौ सेवा समिति नौसर (भदलिया) एवं श्री बालाजी गौ सेवा समिति बरवाली को ₹21-21 हजार की सहयोग राशि दी गई।
वहीं संत अयोध्यादास गौ सेवा समिति बरवाला को ₹81 हजार तथा भागवत कथा मंडली को ₹1 लाख 94 हजार की भेंट राशि समर्पित की गई।
इस अवसर पर राजेन्द्रसिंह लूणावास ने कहा कि सेवा और संस्कार से ओतप्रोत इस योगदान ने सिद्ध कर दिया है कि बेटियां केवल परिवार की शान ही नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और समाज की सशक्त आधारशिला भी हैं। उनके इस समर्पण से समाज में सेवा, परोपकार और संस्कारों की भावना को नई मजबूती मिली है।
समाज के प्रबुद्धजनों ने इस पुण्य कार्य की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों द्वारा किया गया यह योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। गौसेवा के प्रति उनकी आस्था एवं समर्पण समाज को सकारात्मक संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति और संस्कार आज भी जीवंत हैं।
इस अवसर पर मंगेजसिंह, रघुनाथसिंह, रामनारायणसिंह, जगदीशसिंह, रामअवतारसिंह, ओमसिंह, मूलसिंह, श्यामसिंह, पूरणसिंह, महावीरसिंह, नंदकिशोरसिंह, सत्यनारायणसिंह, कुलदीपसिंह, मुरलीधरसिंह, दीपकसिंह (बरवाला), दलीपसिंह (वीदियाद), रणजीतसिंह (कूकडोद), हरिसिंह (सूथली) सहित समाजबंधुओं ने सभी बहन-बेटियों का अभिनंदन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



