बाय गांव का ऐतिहासिक दशहरा मेला, जहां होता है राम-रावण युद्ध
राजस्थान के सीकर जिले का बाय गांव अपने अनोखे दशहरा मेले के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यहां दशहरे पर रावण का पुतला जलाने की परंपरा नहीं है, बल्कि भगवान श्रीराम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध का जीवंत मंचन किया जाता है। करीब 180 साल पुरानी यह परंपरा आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
180 साल से निभाई जा रही अनूठी परंपरा
दांतारामगढ़ क्षेत्र के बाय गांव में दशहरे का आयोजन दूसरे स्थानों से अलग होता है। यहां गांव के लोग ही भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान, रावण और मेघनाद जैसे पात्रों की भूमिका निभाते हैं। पारंपरिक वेशभूषा, शस्त्रों और दमदार अभिनय के साथ राम-रावण युद्ध का मंचन किया जाता है, जो दर्शकों को त्रेतायुग की याद दिलाता है।
दशहरा मेले में उमड़ती है हजारों लोगों की भीड़
बाय गांव का दशहरा मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक संस्कृति और मनोरंजन का भी संगम है। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम, आकर्षक झांकियां, स्थानीय बाजार, झूले और खान-पान की दुकानें लोगों को आकर्षित करती हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस अनूठी परंपरा को देखने पहुंचते हैं।
शेखावाटी की सांस्कृतिक विरासत की पहचान
बाय गांव का दशहरा मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राजस्थान की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत



