उत्तर प्रदेश के बरेली से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से बन रही एक पानी की टंकी निर्माण के दौरान ही नदी में समा गई। बताया जा रहा है कि नदी के कटान के चलते निर्माणाधीन टंकी का एक हिस्सा प्रभावित हुआ और देखते ही देखते पूरी संरचना नदी की ओर खिसक गई।
घटना सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। जिस प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे थे, उसके नदी में समा जाने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और प्रोजेक्ट की जगह को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कटान के चलते नदी में समाई निर्माणाधीन टंकी
जानकारी के मुताबिक, पानी की टंकी का निर्माण नदी के किनारे किया जा रहा था। इसी दौरान नदी में लगातार हो रहे कटान का असर निर्माणाधीन ढांचे पर पड़ा। कटान बढ़ने के साथ जमीन कमजोर होती गई और टंकी का ढांचा अपनी जगह से खिसकने लगा।
इसके बाद निर्माणाधीन टंकी नदी में जा गिरी। घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। करोड़ों रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के इस तरह नदी में समा जाने की खबर तेजी से फैल गई।
करीब 4 करोड़ रुपये की लागत का था प्रोजेक्ट
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पानी की टंकी पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे, वह निर्माण पूरा होने से पहले ही नदी में कैसे समा गई?
घटना के बाद प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोग यह जानना चाहते हैं कि टंकी के निर्माण के लिए जगह का चयन किस आधार पर किया गया था और नदी के कटान से जुड़े संभावित खतरे को निर्माण से पहले ध्यान में रखा गया था या नहीं।
करोड़ों के प्रोजेक्ट को लेकर लोगों में नाराजगी
स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं और अगर निर्माणाधीन ढांचा ही सुरक्षित नहीं रह पाए तो योजना का फायदा लोगों तक कैसे पहुंचेगा।
पानी की टंकी का निर्माण पूरा होने के बाद आसपास के लोगों को पानी की सुविधा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन निर्माण के दौरान ही टंकी के नदी में समा जाने से पूरा प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में आ गया है।
अब जांच के बाद सामने आएगी असली वजह
घटना के बाद अब सबसे जरूरी यह है कि पूरे मामले की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराई जाए। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि टंकी के निर्माण के लिए जमीन कितनी सुरक्षित थी, नदी के कटान का कितना असर था और निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन हुआ या नहीं।
इसके अलावा प्रोजेक्ट की लागत, निर्माण एजेंसी और काम की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।



