दिल्ली में बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान बंदरों को भगाने के लिए लंगूर की आवाज निकालने वाले एक्सपर्ट तैनात होंगे, कबूतरों से निपटने के भी इंतजाम।
नई दिल्ली | नई दिल्ली में होने वाली बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में हैं। इस बार आयोजकों के सामने सिर्फ खिलाड़ियों और दर्शकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने की चुनौती नहीं है, बल्कि स्टेडियम में बंदरों और कबूतरों की एंट्री रोकना भी बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए आयोजकों ने एक बेहद अनोखा तरीका अपनाया है। बंदरों को दूर रखने के लिए लंगूर की आवाज निकालने वाले विशेषज्ञों, जिन्हें 'मंकी व्हिस्परर्स' भी कहा जा रहा है, की मदद ली जाएगी।
बंदरों को डराने के लिए निकलेगी लंगूर की आवाज
दिल्ली में रीसस मकाक यानी बंदरों की मौजूदगी लंबे समय से परेशानी का कारण रही है। ये बंदर कई बार सरकारी दफ्तरों, इमारतों और सार्वजनिक स्थानों में घुस जाते हैं। ऐसे में इन्हें नुकसान पहुंचाए बिना दूर रखने के लिए लंगूर की आवाज की नकल करने का तरीका अपनाया जाता है।
बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए काम करने वाली टीम में ऐसे लोग शामिल किए गए हैं, जिन्हें लंगूर की आवाज निकालने का खास अनुभव है। इनमें जफर भी शामिल हैं, जो इस काम से जुड़ी तीसरी पीढ़ी के व्यक्ति हैं। स्टेडियम के दौरे के दौरान उन्होंने मीडिया के सामने लंगूर जैसी आवाज निकालकर इस तरीके का प्रदर्शन भी किया।
जफर के मुताबिक, छोटे रीसस बंदर लंगूरों से डरते हैं। इसलिए लंगूर की आवाज सुनकर वे इलाके से दूर चले जाते हैं। इस तरीके का मकसद बंदरों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें स्टेडियम में आने से रोकना है।
इंडियन ओपन में दिखा था स्टेडियम के अंदर बंदर
आयोजकों ने यह कदम अचानक नहीं उठाया है। जनवरी 2026 में हुए इंडिया ओपन के दौरान इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में एक बंदर के पहुंचने की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए पहले से व्यापक तैयारी की गई है।
वर्ल्ड चैंपियनशिप का आयोजन 17 से 23 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली में होना है। दुनिया के शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी इस बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा लेने पहुंचेंगे, इसलिए आयोजक किसी भी तरह की परेशानी से बचना चाहते हैं।
कबूतरों से निपटने के लिए भी खास इंतजाम
स्टेडियम में आयोजकों की परेशानी सिर्फ बंदरों तक सीमित नहीं है। कबूतरों की मौजूदगी भी एक बड़ी चुनौती रही है। इंडिया ओपन के दौरान कबूतरों की बीट कोर्ट पर गिरने के कारण एक मैच को दो बार रोकना पड़ा था। इस घटना के बाद आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए पक्षियों को नियंत्रित करने पर भी खास ध्यान दिया गया है।
कबूतरों को स्टेडियम की छत और डक्ट्स पर बैठने से रोकने के लिए नॉन-टॉक्सिक जेल लगाया गया है। इसका उद्देश्य पक्षियों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें उन जगहों पर बैठने से रोकना है जहां से वे कोर्ट और खिलाड़ियों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं।
BAI ने कहा- पिछली समस्याओं का समाधान हो गया
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के सेक्रेटरी जनरल संजय मिश्रा ने तैयारियों को लेकर कहा कि इंडियन ओपन के दौरान सामने आई समस्याओं का समाधान कर लिया गया है। उनके मुताबिक, खेल मंत्रालय ने स्टेडियम की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए काफी काम किया है और बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) भी मौजूदा व्यवस्थाओं से पूरी तरह संतुष्ट है।




