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आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का छापा, 10 ठिकानों पर रेड

ED ने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी समेत 10 ठिकानों पर छापेमारी की। टीम दस्तावेज खंगाल रही है और सरकारी ठेकों के पैसों की जांच कर रही है।

eNews Bharat19 August 2026
आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का छापा, 10 ठिकानों पर रेड

रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में ED की कार्रवाई, PMLA के तहत जांच; यूनिवर्सिटी में क्लासेज जारी, छात्रों के ID कार्ड चेक किए जा रहे।

रामपुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार सुबह छापेमारी की। सुबह करीब 7 बजे तीन गाड़ियों में पहुंची ED की करीब 15 अधिकारियों की टीम यूनिवर्सिटी परिसर में जांच कर रही है। टीम द्वारा महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है।

छापेमारी को देखते हुए यूनिवर्सिटी के बाहर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। हालांकि, कार्रवाई के बीच यूनिवर्सिटी में नियमित कक्षाएं चल रही हैं। छात्रों को ID कार्ड की जांच के बाद परिसर में प्रवेश दिया जा रहा है, जबकि पैरेंट्स के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 ठिकानों पर कार्रवाई

ED की यह कार्रवाई केवल जौहर यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं है। जानकारी के मुताबिक, रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में कुल 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की जा रही है। ये ठिकाने आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ट्रस्ट से संबंधित बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दे रहा है। एजेंसी की जांच सरकारी ठेकों से जुड़े पैसों के कथित लेनदेन और उनके यूनिवर्सिटी या ट्रस्ट तक पहुंचने के आरोपों पर केंद्रित है।

सरकारी ठेकों के पैसों की जांच

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सरकारी ठेकों से मिले पैसों को कथित तौर पर दूसरे माध्यमों के जरिए जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट तक पहुंचाया गया। आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी की संपत्तियां बनाने और अन्य गतिविधियों में किया गया।

अब ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी ठेकों से जुड़ा पैसा किन लोगों और कंपनियों के माध्यम से ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी तक पहुंचा। जांच के दौरान वित्तीय दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।

पहले भी हो चुकी है ED की कार्रवाई

जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान से जुड़े ठिकाने पहले भी जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। जुलाई 2019 में ED ने यूनिवर्सिटी में छापा मारकर सर्च ऑपरेशन चलाया था और दस्तावेज जब्त किए थे।

इसके बाद सितंबर 2023 में इनकम टैक्स और ED ने आजम खान के आवास तथा जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ठिकानों पर करीब तीन दिनों तक छापेमारी की थी। बाद में संदिग्ध बैंक लेनदेन से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद ED की ओर से समन जारी किए गए थे।

38 इमारतों को गिराने के आदेश पर लगी रोक

जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में है। 15 जुलाई को रामपुर के जिलाधिकारी ने यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को ढहाने का आदेश दिया था। प्रशासन की ओर से कहा गया था कि इन इमारतों का निर्माण बिना नक्शा पास कराए किया गया।

हालांकि, मुरादाबाद के कमिश्नर आन्जनेय सिंह की कोर्ट ने रामपुर DM के आदेश पर रोक लगा दी। इस मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

आजम खान के खिलाफ 100 से ज्यादा मामले

आजम खान के खिलाफ 100 से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। उनके वकील इमरानुल्लाह के अनुसार, दोहरे पैन कार्ड मामले को छोड़कर अन्य मामलों में उन्हें या तो जमानत मिल चुकी है या वे बरी हो चुके हैं।

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आजम खान फिलहाल दोहरे पैन कार्ड मामले में कोर्ट से सजा मिलने के बाद जेल में हैं। उन्होंने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर रखी है।

शिवपाल के बयान के बाद सियासी बयानबाजी तेज

ED की कार्रवाई से पहले 12 अगस्त को सपा नेता शिवपाल यादव ने रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो आजम खान को गृहमंत्री बनाया जाएगा और उनके खिलाफ हुए कथित अन्याय का बदला लिया जाएगा।

शिवपाल यादव के इस बयान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना आजम खान का नाम लिए पलटवार किया था। योगी ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह ऐसे व्यक्ति की पैरोकारी कर रही है, जिसके नाम पर विश्वविद्यालय बनाया गया।

मुख्यमंत्री ने सपा पर भविष्य में दंगे करवाने की राजनीति करने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने मुजफ्फरनगर और सहारनपुर दंगों से जुड़े अपने आरोपों का भी जिक्र किया।

2005 में हुई थी जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना

आजम खान ने 2005 में जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना कराई थी। यूनिवर्सिटी का नाम स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर रखा गया है।

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे थे। वह मुस्लिम लीग और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, दोनों के अध्यक्ष रह चुके थे।

फिलहाल ED की टीम यूनिवर्सिटी और अन्य ठिकानों पर दस्तावेजों एवं वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एजेंसी को जांच के दौरान क्या महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।


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