केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (सीएसडब्ल्यूआरआई), अविकानगर मालपुरा (टोंक) में 21वें राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम तथा महात्मा ज्योतिबा फुले कॉलेज ऑफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंस से आए 15 विद्यार्थियों के इंटर्नशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 45 किसानों ने पंजीकरण करवाया है, जिन्हें भेड़ एवं बकरी पालन की उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और किसानों में कौशल विकास को बढ़ावा देना और पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक ज्ञान का विस्तार करना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने कहा कि भेड़ एवं बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि उन्नत नस्ल, स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित पोषण और वैज्ञानिक आवास प्रबंधन पर ध्यान देकर पशुपालक अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण अवधि का अधिकतम लाभ उठाएं और आधुनिक पशुपालन तकनीकों को व्यवहार में अपनाएं। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार के “खेत बचाओ अभियान” का उल्लेख करते हुए किसानों से रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
कार्यक्रम में एनिमल फिजियोलॉजी अनुभाग के प्रभारी डॉ. एस. एस. डांगी, टीओटी एवं एसएस प्रभारी डॉ. एल. आर. गुर्जर, एलपीटी प्रभारी डॉ. अरविंद सोनी, वैज्ञानिक डॉ. पी. के. मलिक, डॉ. नृपेन्द्र प्रताप सिंह तथा तकनीकी अधिकारी गौतम चौपड़ा सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. एस. एस. डांगी द्वारा किया गया। अंत में सभी अतिथियों, किसानों और प्रशिक्षणार्थियों का आभार व्यक्त किया गया।
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