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अविकानगर में भेड़-बकरी में कृत्रिम गर्भाधान पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

अविकानगर (टोंक) स्थित केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान में भेड़-बकरी में कृत्रिम गर्भाधान पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ

सुरेश भदाला17 February 2026
अविकानगर में भेड़-बकरी में कृत्रिम गर्भाधान पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

भाकृअनुप- केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर (मालपुरा, टोंक) में 17 फरवरी 2026 से “भेड़ एवं बकरी में कृत्रिम गर्भाधान (AI)” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के प्रथम बैच का उद्घाटन संस्थान परिसर में किया गया।

वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विभिन्न चरणों में किया जाएगा, जिसके अंतर्गत राजस्थान के विभिन्न जिलों के पशुपालन विभाग के लगभग 700 पशु चिकित्सकों एवं पैरावेटेरिनरी कार्मिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

आनुवंशिक सुधार और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर

कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह भट्ट (अध्यक्ष, पशु पोषण विभाग) ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्घाटन संबोधन में राजस्थान में भेड़-बकरियों के आनुवंशिक सुधार, प्रजनन दक्षता बढ़ाने तथा उत्पादकता में वृद्धि हेतु कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि एआई तकनीक के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक प्रसार के लिए क्षेत्रीय पशु चिकित्सकों का व्यवस्थित प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है।

तकनीकी दक्षता को किया जाएगा मजबूत

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अजीत सिंह महला ने बताया कि यह प्रशिक्षण भेड़ एवं बकरी में मद-समकालन, सीमेन प्रोसेसिंग तथा कृत्रिम गर्भाधान तकनीकों में पशु चिकित्सकों की तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे राज्य में पशुपालकों की आजीविका को मजबूती मिलेगी।

डॉ. सिद्धार्थ सारथी मिश्रा (एजीबी विभागाध्यक्ष) ने नस्ल सुधार में प्रजनन तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फील्ड में कार्यरत पशु चिकित्सकों को नस्ल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एआई तकनीक का उपयोग करना चाहिए।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत प्रायोजित

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. एस.एस. डांगी, डॉ. मेघा पांडे, डॉ. अजीत सिंह महला एवं डॉ. वी. राल्ते द्वारा निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम विभिन्न बैचों में आयोजित किया जाएगा और इसे राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड द्वारा केंद्र प्रवर्तित राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत प्रायोजित किया गया है।

इस पहल का उद्देश्य राज्य में भेड़ एवं बकरी में कृत्रिम गर्भाधान के प्रभावी क्षेत्रीय क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना है, जिससे पशुधन क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिले और ग्रामीण आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

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