टोंक जिले के मालपुरा स्थित केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (अविकानगर) में राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के सहयोग से “भेड़ एवं बकरी में कृत्रिम गर्भाधान” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 25-26 फरवरी 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन संस्थान के पशु बायोकेमिस्ट्री एवं फिजियोलॉजी विभाग द्वारा किया गया।
यह प्रशिक्षण राज्य सरकार की पहल के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेशभर के लगभग 700 पशुधन प्रसार अधिकारियों और पशुधन निरीक्षकों को विभिन्न बैचों में प्रशिक्षित किया जाना है। अब तक 254 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वर्तमान में पांचवें बैच में 43 प्रतिभागी (39 पुरुष एवं 4 महिलाएं) उदयपुर, भीलवाड़ा और नागौर जिलों से प्रशिक्षण के लिए पहुंचे।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. त्रिभुवन शर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि घटती कृषि जोतों के दौर में छोटे पशुओं का वैज्ञानिक प्रबंधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना सकता है। उन्होंने पशु उत्पादों के रिकॉर्ड उत्पादन, आत्मनिर्भर भारत 2047 के लक्ष्य और निर्यात क्षमता बढ़ाने पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने की। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे संस्थान और किसानों के बीच सेतु बनकर आधुनिक तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाएं। विशिष्ट अतिथि डॉ. एच. के. नरूला और डॉ. अशोक कुमार ने भी प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस ज्ञान का उद्देश्य पशुपालकों की आय में वृद्धि और आजीविका सुदृढ़ करना है।
कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. सत्यवीर सिंह डागी, डॉ. अजीत सिंह महला और विभागीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा प्रशिक्षण पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। संस्थान मार्च माह तक सभी 700 पशुधन कर्मियों को प्रशिक्षण देने के लक्ष्य पर कार्यरत है। मीडिया प्रभारी डॉ. अमर सिंह मीना ने कार्यक्रम की जानकारी साझा की।




