केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली के फ्लैगशिप कार्यक्रम “मेरा गांव मेरा गौरव” के अंतर्गत मालपुरा क्षेत्र के भीपुर एवं हणुतिया गांवों में किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम 16 अप्रैल की रात्रि चौपाल से शुरू होकर 17 अप्रैल 2026 की सुबह तक चला। इसमें किसानों को रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग और देशी खाद, सड़ी गोबर खाद, हरी खाद, ढेंचा तथा फसल अवशेषों से बनी जैविक खाद के उपयोग के लिए जागरूक किया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में ऑर्गेनिक और केंचुआ खाद बनाने की विधि, उनके लाभ, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, पशु पोषण, प्रजनन प्रबंधन तथा गर्मियों में पशुओं के रखरखाव जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में किसानों को पशुओं की विभिन्न बीमारियों के लिए परामर्श दिया गया तथा मिनरल मिक्सचर का वितरण भी किया गया।
डॉ. अरुण कुमार तोमर ने किसानों से सॉइल हेल्थ कार्ड अपनाने का आग्रह किया और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर बढ़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि खेती और पशुपालन में लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना जरूरी है।
उन्होंने फसल चक्र अपनाने, सही समय और सही मात्रा में खाद उपयोग करने पर भी जोर दिया।
इस किसान गोष्ठी में टीम लीडर डॉ. सिद्धार्थ सारथी मिश्रा, डॉ. रणधीर सिंह भट्ट एवं उनकी टीम ने विभिन्न विषयों पर किसानों से संवाद किया और उन्हें तकनीकी जानकारी प्रदान की।
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