भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के फ्लैगशिप कार्यक्रम “मेरा गांव मेरा गौरव” के तहत केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान द्वारा ग्राम रिंडालिया बुजुर्ग में किसानों एवं पशुपालकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना रहा।
अविकानगर संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में टीम लीडर डॉ. लीलाराम गुर्जर ने किसानों एवं पशुपालकों को मृदा परीक्षण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिना मिट्टी जांच के अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग भूमि की उर्वरता को कम कर रहा है।
उन्होंने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने, गोबर खाद, जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य जैविक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी। साथ ही रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए “सही उर्वरक, सही मात्रा और सही समय” का संदेश दिया।
वैज्ञानिकों ने फसल चक्र अपनाने, खेतों में जैविक अवशेष प्रबंधन एवं मिट्टी की सेहत सुधारने के उपायों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में पोषण विभाग तथा पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग के विशेषज्ञों ने कृषि एवं पशुपालन से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में कुल 31 पुरुष एवं 05 महिला किसान-पशुपालक शामिल हुए। पशुपालक अपने रेवड़ के साथ उपस्थित रहे, जिनमें लगभग 700 भेड़ एवं बकरियां शामिल थीं। इस दौरान लगभग 50 पशुओं का उपचार किया गया तथा आवश्यक दवाइयों का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. सरोबाना सरकार, डॉ. गरिमा चौधरी, डॉ. रजनी चौधरी, डी.के. यादव एवं महाराम मीना ने भी किसानों से खेती एवं पशुपालन पर चर्चा की।




