केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा टोंक जिले की मालपुरा तहसील के सीतारामपुरा, पीपलिया, कचौलिया तथा फागी तहसील के कंग्यागांव सहित विभिन्न गांवों में ‘रात्रि चौपाल’ के माध्यम से “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
दिनांक 15 जून 2026 को आयोजित इस विशेष रात्रि चौपाल एवं किसान गोष्ठी में संस्थान की चार टीमों ने भाग लिया। इस दौरान कुल 193 स्थानीय किसानों ने सक्रिय सहभागिता दर्ज की, जिनमें पुरुष एवं महिलाएं दोनों शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. एस.एस. मिश्रा, डॉ. पी.के. मलिक, डॉ. सुभाष कछवाहा, डॉ. लीलाराम गुर्जर, डॉ. अजित सिंह महला, डॉ. चंदन गुप्ता, डॉ. रणजीत सिंह गोदारा एवं डॉ. अमर सिंह मीना सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे। इस दौरान मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण और प्राकृतिक खेती अपनाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खाद के प्रयोग और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी। साथ ही जीवामृत निर्माण, हरी खाद के उपयोग तथा फसल चक्र अपनाने के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने मिट्टी, फसल, पशु और मानव स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के बढ़ते खतरे के प्रति चेतावनी दी। उन्होंने प्राकृतिक और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर “स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ फसल, स्वस्थ पशु और स्वस्थ मानव” की अवधारणा को मजबूत करने पर बल दिया।
रात्रि चौपाल का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें किसानों के सवालों के वैज्ञानिक समाधान दिए गए। कार्यक्रम में तीन किसानों को प्रश्नोत्तरी में सही उत्तर देने पर पुरस्कृत भी किया गया, जिससे आयोजन को और अधिक रोचक एवं प्रेरणादायक बनाया गया।
इस अभियान में संस्थान की चार टीमों ने अलग-अलग गांवों में जागरूकता शिविर आयोजित कर किसानों को रासायनिक खाद के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में सीताराम मीना, महाराम मीना, महेश चंद मीना, सुरेंद्र सिंह, अंशुल शर्मा सहित अविकानगर संस्थान के अन्य कर्मचारियों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।




