अविकानगर के खेत बचाओ अभियान से किसान हुए जागरूक, टिकाऊ कृषि पर दिया जोर
केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा मालपुरा तहसील के धौली, लामिया जूनारदार, बम्बोरी और नयागांव श्रीरामगंग गांवों में "खेत बचाओ अभियान" के तहत विशेष रात्रि चौपाल एवं किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक खेती और समग्र स्वास्थ्य के प्रति किसानों को जागरूक करना था।
8 जून 2026 को आयोजित इस रात्रिकालीन कार्यक्रम में कुल 258 किसानों ने भाग लिया। संस्थान की चार अलग-अलग टीमों ने संबंधित गांवों में पहुंचकर किसानों को मिट्टी संरक्षण, जैविक खेती और रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी।
डॉ. एस.एस. मिश्रा, डॉ. रणधीर सिंह भट्ट, डॉ. अजय कुमार एवं सत्यवीर सिंह डांगी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम ने मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने तथा प्राकृतिक खेती अपनाने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खाद के अधिकतम प्रयोग की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को जीवामृत तैयार करने और उसके उपयोग, हरी खाद अपनाने तथा फसल चक्र प्रणाली के महत्व की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि इन उपायों से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन लागत कम होती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
गोष्ठी का प्रमुख विषय मिट्टी, फसल, पशु और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंध रहा। विशेषज्ञों ने रासायनिक दवाओं और एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न हो रहे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के खतरे पर भी किसानों को जागरूक किया। उन्होंने प्राकृतिक और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ फसल, स्वस्थ पशु और स्वस्थ मानव की अवधारणा को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें किसानों के सवालों के समाधान विशेषज्ञों द्वारा दिए गए। तकनीकी विषयों पर आधारित प्रश्नों के सही उत्तर देने वाले तीन किसानों को उपहार देकर सम्मानित किया गया। संस्थान की चारों टीमों ने विभिन्न गांवों में जागरूकता शिविर आयोजित कर किसानों को रासायनिक खाद के सीमित उपयोग और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।




