प्रयागराज में अशरफ की कुर्क जमीन पर अवैध प्लाटिंग का मामला
प्रयागराज के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र में माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ की गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई जमीन पर कथित कब्जे और अवैध प्लाटिंग का मामला सामने आया है। प्रशासन के मुताबिक, जमीन पर कब्जा कर उसे प्लॉट के रूप में बेचने की कोशिश की गई।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की और अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर चलाया गया। इसके बाद तीन बिल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।
तीन बिल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज
मामले में लेखपाल मनीष कुमार की ओर से बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम, मोहम्मद नसरत और मोहम्मद आफताब अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों को अतीक अहमद का फाइनेंसर बताया गया है।
FIR में आरोप है कि शाहा उर्फ पीपल गांव की आराजी संख्या 1115 की 0.4680 क्षेत्रफल वाली जमीन पर कब्जा किया गया था। यह जमीन गैंगस्टर एक्ट के तहत पहले ही कुर्क की जा चुकी थी और संबंधित थाना प्रभारी को इसका कस्टोडियन बनाया गया था।
22 अगस्त को चला बुलडोजर
प्रशासन को जमीन पर कब्जे की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय अधिकारी सक्रिय हुए। रिपोर्ट के अनुसार, 22 अगस्त को SDM सदर की मौजूदगी में कार्रवाई की गई और जमीन पर की गई कथित अवैध प्लाटिंग को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।
कार्रवाई के बाद अब इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कुर्क जमीन पर कब्जा कैसे हुआ और वहां अवैध प्लाटिंग किस तरह की गई।
कुर्क जमीन पर कब्जे से उठे कई सवाल
इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क थी और उसका कस्टोडियन संबंधित थाना प्रभारी को बनाया गया था, तो वहां कब्जा और प्लाटिंग कैसे हो गई।
इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि जमीन पर प्लाटिंग कर उसे बेचने की प्रक्रिया कब शुरू हुई और इसकी जानकारी प्रशासन या पुलिस को पहले क्यों नहीं हुई। फिलहाल अधिकारियों की जांच के बाद ही इन सवालों के जवाब सामने आएंगे।
कुर्क संपत्ति की निगरानी पर भी सवाल
किसी आपराधिक मामले में संपत्ति कुर्क किए जाने के बाद उसकी निगरानी और सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में कुर्क जमीन पर कब्जे का मामला सामने आना गंभीर माना जा रहा है।
प्रयागराज के इस मामले में भी अब जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि जमीन पर कब्जा करने और कथित तौर पर प्लाटिंग करने में कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कुर्क संपत्ति की निगरानी में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।



