हिन्द मजदूर सभा से संलग्न राजस्थान आंगनबाड़ी आशा सहयोगिनी वर्कर्स यूनियन द्वारा आशा सहयोगिनियों की विभिन्न मांगों के निराकरण हेतु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री तथा प्रमुख शासन सचिव को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में आशा सहयोगिनियों की समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की गई।
संरक्षक चम्पा वर्मा ने बताया कि राजस्थान में लगभग 53795 आशा सहयोगिनी कार्यरत हैं, जबकि स्वीकृत पदों की संख्या करीब 55816 है। कोटा संभाग के कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों में लगभग 5000 आशा सहयोगिनी कार्यरत हैं। लंबे समय से मानदेय और प्रोत्साहन राशि समय पर नहीं मिलने से कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में बताया गया कि कई मामलों में भुगतान तीन से चार माह तक लंबित रहता है। साथ ही वर्ष 2026 के बजट में घोषित 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि का लाभ अब तक सभी को नहीं मिला है। यूनियन ने मांग की कि सभी बकाया राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए और समान रूप से लाभ दिया जाए।
संघ ने प्रमोशन नीति लागू करने की भी मांग की है, जिसमें आशा सहयोगिनियों को अनुभव और योग्यता के आधार पर एएनएम या सुपरवाइजर पदों पर पदोन्नति दी जाए। साथ ही 25 से 30 वर्ष सेवा देने वाली महिलाओं के लिए विशेष लाभ की भी मांग रखी गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आशा सहयोगिनियों पर लगातार अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है जिससे मानसिक तनाव की स्थिति बन रही है। यूनियन ने मांग की कि मूल स्वास्थ्य कार्यों के अलावा अन्य गैर-जरूरी कार्य उनसे न करवाए जाएं।
आशा सॉफ्ट क्लेम के भुगतान को एकमुश्त करने, प्रोत्साहन राशि तीन गुना करने, ओटीपी सिस्टम हटाने, नया टैबलेट और स्मार्टफोन देने, तथा मोबाइल रिचार्ज राशि 600 से बढ़ाकर 1000 रुपये करने की भी मांग रखी गई।
इसके अलावा यूनिफॉर्म और जूते उपलब्ध कराने, आरोग्य समिति भुगतान समय पर करने, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये एकमुश्त या 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने, सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की भी मांग की गई।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने सभी मांगों पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश निदेशक आरसीएच को दिए। निदेशक ने कई मांगों पर शीघ्र आदेश जारी करने का आश्वासन दिया।




