मालपुरा तहसील के अरनिया गांव में केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (नई दिल्ली) के “मेरा गांव मेरा गौरव” कार्यक्रम के अंतर्गत किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम फार्मर फर्स्ट प्रोजेक्ट के तहत 27 अप्रैल 2026 को संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई। साथ ही देशी खाद, सड़ी गोबर खाद, हरी खाद (ढेंचा) और फसली अवशेषों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
संस्थान निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में ऑर्गेनिक खेती, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) बनाने के तरीके और उसके लाभों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही पशु पोषण, प्रजनन प्रबंधन और गर्मियों में पशुओं की देखभाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी किसानों को प्रशिक्षित किया गया।
विशेषज्ञों ने पशुओं में होने वाली बीमारियों, विशेषकर तेनैला रोग और भेड़ों में गले की सूजन जैसी समस्याओं के समाधान भी बताए। पशुपालकों को मिनरल मिक्सचर ईंट और भेड़ पालन स्वास्थ्य कैलेंडर भी वितरित किया गया।
फार्मर फर्स्ट प्रोजेक्ट के पीआई डॉ. सत्यवीर सिंह डागी ने किसानों से सॉइल हेल्थ कार्ड अपनाने और भविष्य में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि ग्रेडिंग, सफाई और पैकिंग के माध्यम से किसान सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचकर अधिक लाभ कमा सकते हैं।
कार्यक्रम में फसल चक्र अपनाने, गर्मियों में गहरी जुताई, संतुलित उर्वरक उपयोग और रोग प्रबंधन जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। इस संगोष्ठी में अरनिया गांव के 91 किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में डॉ. सत्यवीर सिंह डागी, डॉ. मेघा पांडे, डॉ. राजेश बिश्नोई, डॉ. अमर सिंह मीना, श्रीमती मीनाक्षी मीना और अंशुल शर्मा सहित टीम के अन्य सदस्यों ने किसानों से संवाद किया। ग्रामीणों ने आयोजन के लिए संस्थान टीम का आभार व्यक्त किया।




