सांस्कृतिक विरासत के रंगों से सजा उपाध्याय परिवार का ढूंढोत्सव, आनंदपुर कालू की गैर ने बांधा समां
ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी गौरवशाली विरासत और परंपराओं को जीवित रखने के उद्देश्य से ग्राम भुम्बलिया स्थित उपाध्याय भवन में मंगलवार को भव्य ढूंढोत्सव का आयोजन किया गया। पृथ्वीराज उपाध्याय और गीता देवी उपाध्याय के पौत्र अनुराग और पौत्री गर्विता के मांगलिक अवसर पर आयोजित इस समारोह में पारंपरिक लोक संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली।
आनंदपुर कालू की अद्वितीय गैर बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम की सबसे खास प्रस्तुति आनंदपुर कालू से आई माली समाज की गैर टोली रही। पारंपरिक भारतीय गणवेश (पोशाक) में सजे कलाकारों ने जोशपूर्ण नृत्य और ढोल की थाप से पूरे आयोजन का माहौल जीवंत बना दिया। गैर नृत्य की इस शानदार प्रस्तुति ने उपस्थित मेहमानों का मन मोह लिया।
इस प्रस्तुति के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक कला से जोड़ने का सार्थक प्रयास भी देखने को मिला।
परंपराओं को जीवित रखने का संकल्प
जितेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में सदियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को सहेजना और उसे अगली पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि “जीवन के रंग निरंतर चलते रहें और हमारी परंपराएं विलुप्त न हों, यही इस आयोजन की मूल भावना है।”
कार्यक्रम में मोनिका-नरेन्द्र उपाध्याय और श्रीमती दीक्षा-जितेन्द्र उपाध्याय के लाड़लों को बड़ों का आशीर्वाद मिला। इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, रिश्तेदार और मित्रगण उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सांस्कृतिक आयोजन की सराहना की।
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