अमेरिका-ईरान जंग के बीच बदली रणनीति?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ बिना किसी औपचारिक परमाणु समझौते के भी जंग खत्म करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के लिए अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम से ज्यादा होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खुलवाना महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल देता है और सामान्य कारोबारी जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो जाती है, तो अमेरिका संघर्ष खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
पहले परमाणु समझौता था अमेरिका की प्राथमिकता
ईरान के खिलाफ अमेरिकी रणनीति में अब तक सबसे बड़ा फोकस उसके परमाणु कार्यक्रम पर रहा है। अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक समझौते पर पहुंचे।
हालांकि, संघर्ष लंबा खिंचने के बाद अमेरिका की प्राथमिकताएं बदलती हुई दिखाई दे रही हैं। अब होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना जंग खत्म करने के लिए अहम मुद्दा बन सकता है।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है, क्योंकि बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से होती है।
अगर इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। तेल की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।
इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य रूप से खोलना अमेरिका के लिए एक बड़ी रणनीतिक प्राथमिकता बन सकता है।
ईरान ने भी रखीं कई बड़ी शर्तें
दूसरी तरफ ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। ईरान की मांग है कि अमेरिका युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करे और अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाए।
इसके अलावा ईरान क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और उस पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है। ईरान ने विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों को रिलीज करने और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग भी रखी है।




