भारत के साथ ईरान के व्यापार पर कितना असर होगा?
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए नए और बेहद कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान के आर्थिक रास्तों को बंद करना और उसकी आय के प्रमुख स्रोतों पर दबाव बढ़ाना है। नए कदमों में दर्जनों लोगों, कंपनियों और जहाजों को प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया है।
अमेरिका ने यह संकेत भी दिया है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों, बैंकों और बिचौलियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में इसका असर केवल ईरान तक सीमित रहने के बजाय दूसरे देशों के व्यापार पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका ने ईरान पर क्यों बढ़ाया प्रतिबंधों का दबाव?
अमेरिकी प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तहत उसके विदेशी व्यापार और कमाई के रास्तों को सीमित करना चाहता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की दिशा में बड़ा अभियान बताया है।
अमेरिका का कहना है कि ईरान अपनी आर्थिक गतिविधियों और प्रतिबंधों से बचने के लिए अलग-अलग नेटवर्क का इस्तेमाल करता है। इसी वजह से अब उन संस्थाओं और लोगों को भी निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है जो ईरान के साथ आर्थिक गतिविधियों में शामिल हैं।
ईरान पर किन क्षेत्रों में बढ़ी सख्ती?
अमेरिकी कार्रवाई में डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान इन क्षेत्रों का इस्तेमाल पैसे के लेन-देन, जरूरी तकनीक हासिल करने, संपत्ति को सुरक्षित रखने और तेल तथा अन्य सामान के निर्यात के लिए करता है।
इसके अलावा अमेरिका ने करीब 60 लोगों, कंपनियों और जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें कुछ ऐसे नेटवर्क से जुड़े बताए गए हैं जिन पर ईरान के मिसाइल, परमाणु, साइबर और तेल से जुड़े कार्यक्रमों में मदद करने के आरोप हैं।
भारत पर अमेरिका के ईरान प्रतिबंधों का क्या असर होगा?
अमेरिका के नए प्रतिबंधों का असर भारत और ईरान के बीच पहले से कमजोर हो चुके व्यापार पर पड़ सकता है। भारत ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल रहा है, हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार 2018-19 के करीब 17 अरब डॉलर के उच्च स्तर से 90 फीसदी से अधिक गिर चुका है।
वर्तमान में भारत से ईरान को मुख्य रूप से ऐसे सामानों का निर्यात किया जाता है जिन्हें मानवीय आधार पर अमेरिकी प्रतिबंधों से कुछ छूट मिली हुई है। इनमें चावल, चाय और दवाओं जैसे उत्पाद शामिल हैं।
चावल, चाय और दवाओं के निर्यात पर क्या असर पड़ेगा?
भारतीय निर्यातकों को चिंता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के और सख्त होने से ईरान के साथ कारोबार करना मुश्किल हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत से ईरान जाने वाले चावल, चाय और दवाओं के व्यापार पर इसका असर पड़ने की आशंका है।
इनमें से कई सामान हाल के वर्षों में दुबई के बंदरगाह के रास्ते ईरान पहुंचते रहे हैं। यदि वित्तीय और शिपिंग नेटवर्क पर दबाव बढ़ता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए भुगतान और सामान की आवाजाही दोनों चुनौती बन सकते हैं।
ईरान के साथ व्यापार के लिए भारत के सामने क्या चुनौती है?
अमेरिका की ओर से विदेशी कंपनियों और बैंकों पर भी दबाव बढ़ाने की चेतावनी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। अगर ईरान के साथ व्यापार करने वाले संस्थानों को अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा रहता है, तो बैंकिंग, भुगतान और शिपिंग से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
दुबई के रास्ते में रुकावट आने के बाद कुछ भारतीय निर्यातक तुर्की जैसे वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, ऐसे विकल्पों में भी अतिरिक्त लागत और नियामकीय चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
चाबहार पोर्ट पर भी बढ़ सकता है दबाव
ईरान के साथ भारत के संबंधों में चाबहार पोर्ट का रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा है। भारत के लिए यह पोर्ट अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है।
अमेरिका-ईरान तनाव और प्रतिबंधों के बीच चाबहार से जुड़ी भारतीय रणनीति भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अमेरिका की प्रतिबंध नीति और क्षेत्रीय तनाव के कारण भारत को अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है।



