3 दिन की सैन्य झड़प के बाद अमेरिका-ईरान में युद्धविराम, होर्मुज स्ट्रेट पर फिर शुरू होगी बातचीत
अमेरिका-ईरान ने फिलहाल रोके सैन्य हमले
अमेरिका और ईरान ने फिलहाल एक-दूसरे पर सैन्य हमले रोकने पर सहमति जताई है। पिछले तीन दिनों से जारी हमलों के बाद दोनों देशों ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 17 जून को हुए समझौते (MoU) के सभी बिंदुओं पर बातचीत जारी रहेगी। इसी सिलसिले में मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता होगी।
होर्मुज स्ट्रेट रहेगा खुला
समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही नहीं रोकी जाएगी। हाल के दिनों में इसी जलमार्ग को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि यदि जहाजों की आवाजाही बाधित हुई तो वह दोबारा सैन्य कार्रवाई करेगा।
दोनों देशों ने किए थे जवाबी हमले
हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और रडार ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों देशों ने फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोककर बातचीत का रास्ता अपनाने पर सहमति जताई।
ईरान का दावा- 30 दिन तक होर्मुज हमारे नियंत्रण में
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगले 30 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में रहेगा। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगे कोई हमला हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
ट्रम्प की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान ने अपना रवैया नहीं बदला तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका अपना सैन्य अभियान आगे भी जारी रखेगा।
IRGC ने दी अमेरिका को धमकी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का प्रभाव लगातार कमजोर हो रहा है और उसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी नहीं मिल रहा।
फ्रांस और सऊदी अरब ने बढ़ाई कूटनीतिक कोशिशें
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने फोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने पर जोर दिया।
समझौते का आर्टिकल-5 क्यों बना विवाद?
17 जून को हुए अमेरिका-ईरान समझौते का आर्टिकल-5 अब दोनों देशों के बीच विवाद का कारण बन गया है। इसके तहत ईरान को 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कॉमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करनी थी। साथ ही जहाजों से किसी तरह का शुल्क नहीं लेने और समुद्री मार्ग में मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाने की भी जिम्मेदारी तय की गई थी।




