चीन से तनाव के बीच भारत के लिए बढ़े व्यापारिक अवसर
अमेरिका की ओर से लगातार टैरिफ दबाव के बावजूद भारत का एक्सपोर्ट सेक्टर फिलहाल मजबूती दिखा रहा है। जुलाई 2025 से जून 2026 के 12 महीनों में अमेरिका को भारत का गुड्स एक्सपोर्ट करीब 2 फीसदी से थोड़ा अधिक घटा, लेकिन कुल भारतीय एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी बनी हुई है।
दरअसल, भारत के एक्सपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा नए अतिरिक्त 10 फीसदी टैरिफ के दायरे से बाहर है। सरकार के मुताबिक करीब 45 फीसदी भारतीय एक्सपोर्ट इस अतिरिक्त शुल्क से बाहर हैं, जिसमें जेनेरिक फार्मास्युटिकल्स और स्मार्टफोन जैसे उत्पाद शामिल हैं।
इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और जेनेरिक फार्मा जैसे सेक्टरों ने भी भारतीय एक्सपोर्ट को संभालने में अहम भूमिका निभाई है। जून 2026 में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में सालाना आधार पर करीब 19 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं टेक्सटाइल और अन्य लेबर-इंटेंसिव सेक्टरों पर टैरिफ का दबाव ज्यादा बना हुआ है।
एक बड़ा कारण अमेरिका की चीन पर सप्लाई चेन निर्भरता कम करने की कोशिश भी है। अमेरिकी कंपनियां वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई बेस तलाश रही हैं, जिससे भारत के एक्सपोर्टर्स को अमेरिकी बाजार में अपनी जगह बनाए रखने का अवसर मिल रहा है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग भारत शिफ्ट हो चुकी है।
भारतीय कंपनियां भी टैरिफ के बदलते माहौल के अनुसार अपनी रणनीति बदल रही हैं। कम प्रभावित उत्पादों पर फोकस और बाजार रणनीति में बदलाव के कारण अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की मांग फिलहाल बनी हुई है।



