अलका याज्ञनिक से अरिजीत सिंह तक: आखिर बॉलीवुड संगीत जगत क्यों गुजर रहा है मुश्किल दौर से?
बॉलीवुड का संगीत जगत इन दिनों कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक ओर दिग्गज गायिका अलका याज्ञनिक दुर्लभ सुनने की बीमारी (Sudden Sensorineural Hearing Loss) से जूझ रही हैं, वहीं सोनू निगम ने गर्दन की गंभीर समस्या और उसके कारण आवाज पर पड़ रहे असर का खुलासा किया है। दक्षिण भारतीय प्लेबैक सिंगर सुजाता मोहन भी गले की समस्या के कारण लंबे समय तक सक्रिय नहीं रह सकीं।
इसी बीच अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग से दूरी बनाने का फैसला किया, जबकि मशहूर संगीतकार प्रीतम ने भी व्यावसायिक संगीत से कुछ समय का ब्रेक लेने की घोषणा कर दी। इन घटनाओं ने बॉलीवुड संगीत उद्योग के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अरिजीत और प्रीतम ने क्यों लिया ब्रेक?
अरिजीत सिंह ने लगातार वर्षों तक सुपरहिट गाने देने के बाद प्लेबैक सिंगिंग से हटने का फैसला किया। वहीं प्रीतम ने अपने जन्मदिन पर सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि वह अब नई रचनात्मक संभावनाओं की तलाश करना चाहते हैं और कुछ समय खुद को देना चाहते हैं।
प्रसिद्ध गायिका महालक्ष्मी अय्यर के मुताबिक, लगातार हिट गानों का दबाव कलाकारों को मानसिक और रचनात्मक रूप से थका देता है। जब कोई कलाकार बेहद लोकप्रिय हो जाता है तो निर्माता और संगीतकार उसी पर निर्भर रहने लगते हैं, जिससे व्यक्तिगत रचनात्मकता के लिए समय कम बचता है।
उन्होंने कहा कि कई कलाकार अब लाइव कॉन्सर्ट और अपने स्वतंत्र संगीत पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं। ऐसे में व्यावसायिक काम से दूरी बनाना उनके लिए एक स्वाभाविक फैसला हो सकता है।
अलका याज्ञनिक की बीमारी ने बढ़ाई चिंता
अलका याज्ञनिक ने पिछले साल बताया था कि वायरल संक्रमण के बाद उन्हें अचानक सुनने की दुर्लभ बीमारी हो गई। इसके बाद उन्होंने रिकॉर्डिंग, कॉन्सर्ट और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बना ली।
उन्होंने युवाओं को लंबे समय तक तेज आवाज में हेडफोन या ईयरफोन इस्तेमाल न करने की सलाह भी दी थी। उनका कहना था कि लगातार तेज आवाज सुनना कानों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या हेडफोन और तेज संगीत बन रहे हैं खतरा?
साउंड इंजीनियर बिश्वदीप चटर्जी का मानना है कि लंबे समय तक बहुत तेज आवाज में संगीत सुनना निश्चित रूप से नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि उनके अनुसार केवल हेडफोन की वजह से ही गंभीर सुनने की समस्या होने के मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं।
उन्होंने बताया कि स्टूडियो में आमतौर पर 85 डेसिबल की आवाज को सुरक्षित माना जाता है। इससे अधिक वॉल्यूम पर लगातार काम करने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
ड्रमर जीनो बैंक्स ने भी कहा कि भारत में लाइव कॉन्सर्ट और बॉलीवुड संगीत अक्सर जरूरत से ज्यादा तेज आवाज में बजाया जाता है। ऐसे में कलाकारों को ईयर मॉनिटर का वॉल्यूम नियंत्रित रखना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर ईयरप्लग का इस्तेमाल करना चाहिए।




