अखेराजोत भवन का भव्य लोकार्पण: समाज की एकता, इतिहास और भविष्य का बना नया केंद्र
राजपुरोहित समाज के सेवड़ वंश की उपशाखा अखेराजोत के गौरवशाली इतिहास एवं पूर्वजों की स्मृतियों को सहेजने के उद्देश्य से निर्मित अखेराजोत भवन का भव्य उद्घाटन एवं लोकार्पण समारोह रविवार को जोधपुर के मंडोर रोड स्थित परिसर में श्रद्धा, उत्साह और गरिमामय वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। समारोह में समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं, विद्यार्थियों और गणमान्य नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही।
अखेराजोत वंश के प्रेरणास्रोत, वीर एवं ऐतिहासिक महापुरुष अखेराज जी राजपुरोहित की पुण्य स्मृति में निर्मित यह भवन समाज की एकजुटता, समर्पण और सहयोग का प्रतीक बनकर सामने आया है। भवन का निर्माण अखेराजोत वंश के आठ गांवों के भाइपा के सामूहिक सहयोग एवं अथक प्रयासों से संभव हुआ है।
कार्यक्रम में जानकारी देते हुए जितेन्द्रसिंह भैंसर कोट ने बताया कि अखेराज जी राजपुरोहित जोधपुर राजपरिवार के अत्यंत विश्वस्त सलाहकार, नीतिज्ञ और राजनिष्ठ व्यक्तित्व थे। उन्होंने महाराजा जसवंतसिंह के विश्वसनीय सहयोगी के रूप में कार्य किया तथा महाराजा अजीतसिंह के संरक्षण और संघर्षपूर्ण काल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मारवाड़ के इतिहास में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
अखेराजोत विकास ट्रस्ट एवं समिति के अध्यक्ष सत्यनारायणसिंह भैंसर खुतड़ी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए समाज की एकता, संगठन और गौरवशाली परंपराओं पर प्रकाश डाला। वहीं सचिव भीमसिंह तिंवरी ने भवन निर्माण की यात्रा और इसकी भावी उपयोगिता की जानकारी दी। उपाध्यक्ष श्यामसिंह खीचन ने सभी अतिथियों, भामाशाहों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
वक्ताओं ने कहा कि यह भवन केवल एक सामाजिक परिसर नहीं होगा, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, इतिहास संरक्षण और सामाजिक चेतना का केंद्र बनेगा। यहां विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों के आयोजन तथा समाज की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का कार्य किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन महेंद्रसिंह खीचन एवं अभयसिंह खेड़ापा ने किया। समारोह में अर्जुनसिंह तिंवरी, मूलसिंह खेड़ापा, हुकमसिंह खीचन, हड़मानसिंह, फौजूसिंह, भंवरसिंह, बलवंतसिंह, जबरसिंह, एडवोकेट करणसिंह भैंसर कोटवाली, बाघसिंह जाटियावास, ओमसिंह धूंधियाड़ी, वीरेंद्रसिंह धूंधियाड़ी, इंद्रसिंह खेड़ापा, शैतानसिंह खेड़ापा, गोविंदसिंह तिंवरी, नथराजसिंह धूंधियाड़ी, प्रेमसिंह सरपंच खीचन, भोपालसिंह भावंडा, श्यामसिंह भावंडा, बाबूसिंह खेड़ापा, सुरेंद्रसिंह खेड़ापा, राजेंद्रसिंह, नारायणसिंह भावंडा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।




