अजमेर में फसल विविधीकरण पायलट परियोजना का आयोजन
अजमेर स्थित श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर जयपुर के कृषि विज्ञान केंद्र में राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा द्वारा संचालित अखिल भारतीय समन्वित कृषि प्रणाली अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत फसल विविधीकरण पायलट परियोजना का आयोजन किया गया। इस दौरान क्षेत्र के लगभग 200 किसानों को बाजरा, मूंग, मूंगफली, ज्वार एवं ग्वार जैसी फसलों के उन्नत बीज एवं कृषि आदान वितरित किए गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. पी. एस. चौहान ने किसानों को बीज एवं कृषि आदानों का वितरण किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों, घटते प्राकृतिक संसाधनों और कृषि की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए फसल विविधीकरण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ विभिन्न फसलों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने की अपील की।
कृषि विज्ञान केंद्र अजमेर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. डी. एस. भाटी ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को संसाधन-संरक्षण एवं जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके और कृषि जोखिमों में कमी आए।
परियोजना प्रभारी डॉ. रामनिवास चौधरी ने कहा कि एकीकृत कृषि प्रणाली और फसल विविधीकरण किसानों के लिए जोखिम प्रबंधन का प्रभावी माध्यम है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और आय में स्थिरता आती है।
शस्य वैज्ञानिक डॉ. मालू राम यादव ने किसानों को बाजरा, मूंग, मूंगफली, ज्वार एवं ग्वार की उन्नत उत्पादन तकनीक, बीजोपचार, पोषक तत्व प्रबंधन तथा कीट एवं रोग नियंत्रण की विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर कृषि अनुसंधान उपकेंद्र अजमेर के प्रभारी डॉ. रामाकांत शर्मा ने भी किसानों को नवीन तकनीकों और अनुसंधान आधारित कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. दिनेश कच्छावा सहित अधिकारी, कर्मचारी एवं 200 से अधिक किसानों ने भाग लिया।




