बोरावड़ के एक युवक की विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का लालच देकर अफ्रीका भेजने, वहां बंधक बनाकर प्रताड़ित करने तथा परिवार से 25 लाख रुपये वसूलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मकराना ने इस्तगासे पर सुनवाई करते हुए मकराना पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए हैं।
बोरावड़ निवासी निवर्तमान पार्षद सुनील सोनी पुत्र घनश्याम सोनी ने एडवोकेट अनिल कुमार सोनी के जरिए न्यायालय में पेश इस्तगासे में आरोप लगाया कि उसके भांजे दीपक सोनी पुत्र स्व. हरीश सोनी को अजमेर के स्टार लाइट टूर एंड ट्रेवल्स के मालिक आरोपी विजय राकानी ने विदेश में अधिक वेतन वाली नौकरी दिलाने का प्रलोभन दिया। आरोप है कि दीपक को अफ्रीका के डीआरसी (किनशासा) स्थित एक कंपनी में भेजने के नाम पर करीब एक लाख रुपये भी लिए गए।
इसके बाद 6 मार्च 2026 को दीपक को विदेश भेज दिया गया। परिवाद में आरोप लगाया गया कि विदेश पहुंचने के बाद आरोपीगण ने दीपक को एक कमरे में बंधक बना लिया। उसके साथ लगातार मारपीट की गई, खाना तक नहीं दिया गया और मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
आरोप है कि दीपक से जबरन खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए तथा उसका आईफोन भी छीन लिया गया। किसी तरह मौका मिलने पर दीपक ने 22 मार्च को मकराना पुलिस को ऑनलाइन शिकायत भेजी।
शिकायत के बाद आरोपी विजय राकानी बोरावड़ आया और पीड़ित परिवार को कथित रूप से धमकाते हुए कहा कि दीपक को वहां बंधक बना लिया गया है तथा आरोपी बेहद खतरनाक और प्रभावशाली लोग हैं।
सुनील सोनी ने आरोप लगाया कि दीपक को जिंदा छुड़ाने के बदले 25 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई तथा पुलिस में कार्रवाई करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। परिवादी ने आरोप लगाया कि आरोपी ने फोन कॉल के जरिए भी परिवार को डराया-धमकाया।
परिवादी ने न्यायालय को बताया कि भय और बेटे की जान बचाने की मजबूरी में दीपक की मां ने जेवर और स्त्रीधन तक बेच दिए। आरोप है कि पहले तीन लाख रुपये आरोपी के खाते में जमा करवाए गए और बाद में 4 अप्रैल को परिवादी सुनील सोनी अपने परिजनों के साथ अजमेर पहुंचे, जहां आरोपियों को 21 लाख रुपये नकद दिए गए।
परिवादी ने दावा किया कि पूरी घटना का वीडियो उसके मोबाइल में सुरक्षित है। इस्तगासे में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने प्रार्थी की भांजी से जबरन तीन खाली चेकों पर हस्ताक्षर करवाकर रख लिए।
आरोप है कि फिरौती की राशि मिलने के बाद दीपक को छोड़ा गया और वह 6 अप्रैल को बोरावड़ लौट आया। घर पहुंचने पर दीपक ने अपने साथ हुई पूरी घटना परिवार को बताई।




