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अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, रिहाई की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट दोषी अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने 25 साल की सजा संबंधी दावा नहीं माना।

Enews Bharat10 September 2026
अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, रिहाई की याचिका खारिज

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में अबू सलेम को झटका

1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। सलेम ने अपनी याचिका में दावा किया था कि भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत तय 25 साल की अधिकतम सजा की अवधि पूरी हो चुकी है और इसलिए उसे जेल से रिहा किया जाना चाहिए।

अबू सलेम की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि भारत लाए जाने के बाद से उसकी हिरासत की अवधि को 25 साल की सीमा में शामिल किया जाना चाहिए। उसने अपनी सजा, हिरासत में बिताए समय और जेल में मिलने वाली रिमिशन को आधार बनाते हुए समय से पहले रिहाई की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले से जुड़ा है मामला

अबू सलेम का नाम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले से जुड़ा रहा है। मार्च 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे। यह मामला देश के सबसे चर्चित आतंकी मामलों में शामिल रहा है।

इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अबू सलेम को साल 2017 में दोषी ठहराया गया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद से वह जेल में अपनी सजा काट रहा है।

पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के समय दिया गया था आश्वासन

अबू सलेम को साल 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण प्रक्रिया के दौरान भारत की ओर से कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए थे। इनमें यह भी शामिल था कि सलेम को मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा और उसकी कैद की अवधि 25 साल से अधिक नहीं होगी।

बाद में अबू सलेम ने इसी प्रत्यर्पण आश्वासन को अपनी कानूनी दलील का आधार बनाया। उसका कहना रहा कि 25 साल की अवधि पूरी होने के बाद उसे रिहा किया जाना चाहिए।

समय से पहले रिहाई की मांग पर पहले भी हुई सुनवाई

अबू सलेम इससे पहले भी अपनी रिहाई और सजा में राहत को लेकर अदालतों का रुख कर चुका है। बॉम्बे हाईकोर्ट में भी उसने समय से पहले रिहाई और रिमिशन से जुड़ी मांग रखी थी। हाईकोर्ट ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया था।

अदालतों के सामने मुख्य सवाल यह रहा है कि भारत में उसकी हिरासत और सजा की अवधि की गणना किस तरह की जाए और पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के दौरान दिए गए आश्वासन का उसकी रिहाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

25 साल की अवधि को लेकर क्या है विवाद?

अबू सलेम का दावा है कि उसने प्रत्यर्पण के बाद 25 साल की अवधि पूरी कर ली है। वहीं, सरकार और अदालतों के सामने इस अवधि की गणना से जुड़े अलग-अलग कानूनी पहलू हैं। इसी वजह से उसकी समयपूर्व रिहाई का मामला लंबे समय से कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में भी सलेम की रिहाई से जुड़ी मांग पर सुनवाई करते हुए उसकी दलीलों को खारिज किया था। कोर्ट के अनुसार, प्रत्यर्पण की शर्त के तहत 25 साल की अवधि अभी पूरी नहीं हुई थी और इस अवधि को नवंबर 2030 में पूरा माना जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्या बदला?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ताजा याचिका खारिज किए जाने के बाद अबू सलेम को तत्काल रिहाई की राहत नहीं मिली है। इसका मतलब है कि उसकी समय से पहले जेल से बाहर आने की मांग को फिलहाल अदालत से मंजूरी नहीं मिली।

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यह फैसला 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले से जुड़े अबू सलेम के लंबे कानूनी विवाद में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अब सलेम को अपनी रिहाई के लिए आगे उपलब्ध कानूनी विकल्पों और सरकार की प्रक्रिया पर निर्भर रहना होगा।

2030 तक जारी रह सकती है सजा

अबू सलेम की रिहाई से जुड़े मामले में नवंबर 2030 की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत में हुई पिछली कार्यवाही के अनुसार, प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत 25 साल की अवधि उस समय पूरी हो सकती है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अबू सलेम को समय से पहले रिहाई नहीं मिली है। 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उसकी सजा और प्रत्यर्पण से जुड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर आगे भी कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।

1993 ब्लास्ट केस में अबू सलेम की भूमिका

अबू सलेम पर 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट की साजिश और उससे जुड़े मामलों में गंभीर आरोप लगे थे। लंबे समय तक विदेश में रहने के बाद उसे पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया। भारत आने के बाद उसके खिलाफ विभिन्न मामलों में कानूनी कार्रवाई चली।

2017 में विशेष टाडा अदालत ने उसे 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद से उसकी सजा, प्रत्यर्पण की शर्तों और रिहाई को लेकर अदालतों में कई बार सुनवाई हुई है।

सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की कोशिश के लिए बड़ा झटका है। अदालत ने फिलहाल उसकी याचिका को राहत देने योग्य नहीं माना है। ऐसे में अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और 25 साल की अवधि पूरी होने से जुड़ी स्थिति पर नजर रहेगी।


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