जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर नया कानूनी विवाद
दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक मामले को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद अब एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित मौजूदगी को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
मुंबई निवासी और खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बताने वाले फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच में यह शिकायत दी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान नाबालिग लड़कों और लड़कियों की कथित मौजूदगी से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जाए।
शिकायत में यह पता लगाने की मांग की गई है कि प्रदर्शन में नाबालिगों को बुलाने, आमंत्रित करने, प्रोत्साहित करने या उनकी भागीदारी बढ़ाने में CJP के नेताओं या अन्य संबंधित लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं। शिकायतकर्ता ने पुलिस से प्रदर्शन के फोटो और वीडियो को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनकी जांच करने की भी मांग की है।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच की मांग
फैजान अंसारी ने पुलिस से प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास की CCTV फुटेज खंगालने की मांग की है। इसके अलावा मीडिया इंटरव्यू, सार्वजनिक बयान, सोशल मीडिया पोस्ट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की भी जांच करने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से प्रदर्शन में नाबालिगों की मौजूदगी और उनकी भागीदारी से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जा सकता है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि अगर जांच के दौरान POCSO एक्ट, भारतीय न्याय संहि तायानी BNS, IT एक्ट या किशोर न्याय अधिनियम के तहत कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए।
पुलिस ने क्या कहा?
इंदौर के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया के मुताबिक, पुलिस को फैजान अंसारी की ओर से शिकायत मिली है। फिलहाल शिकायत की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में फिलहाल CJP के संयोजक अभिजीत दीपके, मुख्य प्रवक्ता सौरव दास या अन्य संबंधित पक्षों की ओर से शिकायत पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शिकायत दर्ज होना आरोपों का साबित होना नहीं है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या कोई कानूनी उल्लंघन हुआ है।




