राजकीय जिला चिकित्सालय श्रीगंगानगर के शिशु रोग विभाग एवं एस.एन.सी.यू. (Special Newborn Care Unit) की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सा टीम की अटूट कर्तव्यनिष्ठा के चलते 900 ग्राम वजन के एक अत्यंत प्रीमैच्योर नवजात शिशु को नया जीवन मिला है।
देव नगर निवासी नीलम और रंजीत सिंह के घर जन्मे इस सतमासिया नवजात बालक को 16 अप्रैल 2026 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जन्म के समय उसका वजन मात्र 900 ग्राम था और वह रोया भी नहीं था, जिसके कारण उसे गंभीर श्वसन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय राठी के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने बच्चे का उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान नवजात को गंभीर पीलिया (जॉन्डिस) तथा नवजातों में होने वाली जानलेवा बीमारी एन.ई.सी. (Necrotizing Enterocolitis) यानी आंतों के गंभीर संक्रमण का सामना करना पड़ा। स्थिति बेहद नाजुक होने के कारण बच्चे को रक्त और प्लेटलेट्स भी चढ़ाने पड़े।
इस चुनौतीपूर्ण उपचार के दौरान डॉ. संजय राठी के कुशल मार्गदर्शन में एस.एन.सी.यू. के नर्सिंग ऑफिसर्स, प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स, शिशु रोग विशेषज्ञों और हेल्पर्स ने दिन-रात मेहनत करते हुए 24 घंटे बच्चे की सघन निगरानी की।
पूरी चिकित्सा टीम की 46 दिनों की अथक मेहनत और समर्पण का सकारात्मक परिणाम तब सामने आया जब नवजात को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद 1350 ग्राम वजन के साथ अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। वर्तमान में बच्चा स्वस्थ है और सामान्य रूप से विकास कर रहा है।
यह सफलता न केवल राजकीय जिला चिकित्सालय की उन्नत नवजात चिकित्सा सेवाओं का प्रमाण है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की समर्पित कार्यशैली का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।
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