16 साल में 32 IAS अधिकारियों के इस्तीफे
सरकारी आंकड़ों और RTI से सामने आई जानकारी के मुताबिक, साल 2010 से अब तक कुल 32 IAS अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं। सरकार ने इन अधिकारियों के नाम, कैडर और इस्तीफा स्वीकार किए जाने की तारीखों की जानकारी उपलब्ध कराई है। हालांकि, इस डेटा में उन अधिकारियों का रिकॉर्ड शामिल नहीं है, जिन्होंने इस्तीफा देने के बाद अपना फैसला बदल लिया और दोबारा सेवा में लौट आए।
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद फिर चर्चा
उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे ने एक बार फिर IAS अधिकारियों के इस्तीफों को लेकर बहस तेज कर दी है। दिव्या मित्तल ने 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा देने का ऐलान किया था। हालांकि, उनके इस्तीफे की मंजूरी अभी उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर लंबित है।
दिव्या मित्तल के फैसले के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी शुरू हुई और सवाल उठने लगा कि आखिर IAS अधिकारी नौकरी छोड़ने का फैसला क्यों लेते हैं और ऐसे मामलों की वास्तविक संख्या कितनी है।
हर साल एक जैसे नहीं रहे इस्तीफे
RTI से मिली जानकारी के अनुसार IAS अधिकारियों के इस्तीफे हर साल समान संख्या में नहीं हुए। साल 2010 में सबसे ज्यादा छह अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे। इसके बाद ज्यादातर वर्षों में यह संख्या एक से चार के बीच रही।
साल 2018 में चार अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए, जबकि 2024 में तीन अधिकारियों के इस्तीफे मंजूर हुए। आंकड़ों से पता चलता है कि IAS इस्तीफों का ट्रेंड अलग-अलग वर्षों में बदलता रहा है।
किस कैडर में सबसे ज्यादा इस्तीफे?
कैडर के हिसाब से पश्चिम बंगाल कैडर में सबसे ज्यादा इस्तीफे देखने को मिले हैं। इसके बाद महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक कैडर का स्थान आता है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध सूची में दी गई तारीख अधिकारी द्वारा इस्तीफा सौंपने की तारीख नहीं, बल्कि सरकार द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने की तारीख है।
इस्तीफा देने के बाद भी बदल सकता है फैसला
IAS सेवा नियमों के तहत इस्तीफा सौंपने के बाद जब तक सक्षम प्राधिकारी उसे स्वीकार नहीं करता, तब तक प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती। इस दौरान अधिकारी अपना इस्तीफा वापस लेकर सेवा में बने रहने का फैसला कर सकता है।
यही वजह है कि सरकार के पास इस्तीफा वापस लेने वाले अधिकारियों का कोई केंद्रीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब यह भी है कि केवल स्वीकृत इस्तीफों की संख्या से IAS अधिकारियों द्वारा इस्तीफा देने की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
शाह फैसल का मामला क्यों है खास?
2010 बैच के UPSC टॉपर शाह फैसल ने जनवरी 2019 में IAS से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा लंबे समय तक सरकार के स्तर पर लंबित रहा। बाद में उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लेने का फैसला किया।



