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Expressway Accident: दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर बंद रास्ते से टकराई SUV, चालक की मौत, तीन घायल: दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर बंद रास्ते से टकराई SUV, चालक की मौत, तीन घायल

कोटा,संवाददाता: तेजपाल सिंह बग्गा

 

Expressway Accident गुरुवार देर रात दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक और गंभीर दुर्घटना के रूप में सामने आया। हरियाणा के गुरुग्राम से निकली एक SUV बंद रास्ते पर पड़े मिट्टी और मलबे से तेज रफ्तार में टकरा गई। हादसे की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि 61 वर्षीय चालक चरत खटाना की मौके पर ही मौत हो गई और तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दुर्घटना कोटा ग्रामीण क्षेत्र के गोपालपुरा टोल प्लाजा के आगे हुई।

 

हादसा कैसे हुआ?

Expressway Accident की मुख्य वजह सड़क निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा संकेतों की भारी कमी थी। जहाँ हादसा हुआ, वहाँ टनल निर्माण कार्य के चलते सड़क पूरी तरह बंद थी, लेकिन— कोई “रास्ता बंद” साइनबोर्ड नहीं लगा था, न रिफ्लेक्टर मौजूद, न चेतावनी लाइट, न ही गति कम करने का संकेत, तेज गति से चल रही SUV को बंद रास्ता दिखा ही नहीं और वह सीधे मलबे के ढेर से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया।

 

महाकाल दर्शन के लिए निकले थे यात्री

यह दुर्घटना और भी दुखद इसलिए है क्योंकि SUV में सवार चारों लोग उज्जैन महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे। चालक चरत खटाना (61), रिटायर्ड इंस्पेक्टर भूपेंद्र यादव, ध्रुव, रेहान, गोपालपुरा टोल नाके के बाद इन यात्रियों को एक्सप्रेसवे छोड़कर सामान्य मार्ग से दरा घाटी की ओर जाना था, लेकिन नेविगेशन की गलती और साइनबोर्ड न होने से यह SUV आगे एक्सप्रेसवे पर चलती रही—जहाँ सड़क बंद थी।

 

एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा प्रबंधन की गंभीर कमी

थाना प्रभारी अशोक कुमार के अनुसार, Expressway Accident की सबसे बड़ी वजह “सुरक्षा संकेतों का अभाव” था। टनल निर्माण का काम कई महीनों से चल रहा है, लेकिन वहाँ—पर्याप्त बैरियर, रिफ्लेक्टर, ब्लिंकिंग लाइट, चेतावनी बोर्ड, जैसे सुरक्षा उपकरण नहीं लगाए गए थे। हाईवे जैसे तेज गति वाले मार्ग पर यह लापरवाही जानलेवा साबित होती है, जैसा कि इस घटना में हुआ।

 

हादसे के तुरंत बाद की स्थिति

रात का समय होने के कारण आसपास के लोग कम थे, लेकिन दुर्घटना की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर दौड़े। उन्होंने कार के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला और पुलिस व एंबुलेंस को सूचना दी। चरत खटाना को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अन्य तीन घायल यात्रियों को कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

 

घायलों की हालत और उपचार

ध्रुव और रेहान को सिर तथा शरीर पर गंभीर चोटें आईं।भूपेंद्र यादव, जो रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर हैं, को भी गंभीर स्थिति में भर्ती किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि— घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया गया,सभी को विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया है,उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है,

 

पुलिस की प्रारंभिक जांच—क्या पाया गया?

पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि यह Expressway Accident “कंपनी की लापरवाही” का परिणाम है।थाना प्रभारी अशोक कुमार ने बताया—सड़क पर सिर्फ एक बैरियर था,न कोई रिफ्लेक्टर,न साइनबोर्ड,न ही खतरे का संकेत, वाहन चालक को पता ही नहीं चला कि आगे सड़क बंद है। परिजनों की रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

 

Expressway Accident ने उठाए नए सवाल

इस दुर्घटना ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं— क्या एक्सप्रेसवे निर्माण कंपनियाँ सुरक्षा मानकों का पालन कर रही हैं? क्या यात्रियों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है? क्या निर्माण क्षेत्र में चेतावनी संकेत अनिवार्य करने के लिए सख्त नियम लागू होंगे?, विशेषज्ञों के अनुसार, एक भी संकेत बोर्ड इस हादसे को रोक सकता था।

 

टनल निर्माण वाले क्षेत्र में क्यों बढ़ा जोखिम?

जहाँ हादसा हुआ, वहाँ टनल निर्माण चल रहा था। ऐसे क्षेत्रों में— सड़कें अस्थायी रूप से बदली जाती हैं, दोनों ओर से आवाजाही रोकी जाती है, बहुत अधिक मलबा इकट्ठा रहता है, मशीनरी और निर्माण सामग्री सड़कों के पास रहती है, इस स्थिति में साइनएज न लगाना सीधे यात्रियों को खतरे में डाल देता है।,

 

भारत में हाईवे सुरक्षा की चुनौतियाँ

भारत में हर साल हजारों सड़क हादसे होते हैं, जिनमें से कई निर्माण क्षेत्रों में साइनएज की कमी के कारण होते हैं। Expressway Accident इस सच्चाई की एक और मिसाल है कि— सड़क निर्माण,सुरक्षा,और प्रशासनिक निगरानी, के बीच समन्वय अब भी बेहद कमजोर है।

 

यह Expressway Accident केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—

कि हाईवे निर्माण में सुरक्षा संकेतों की अनदेखी लोगों की जान की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।यदि सड़क बंद होने की उचित जानकारी होती, तो चरत खटाना की जान बच सकती थी और तीन लोग घायल न होते। सरकार और निर्माण कंपनियों को दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करना होगा। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और तीनों घायल अस्पताल में उपचाराधीन हैं

 

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