रानीवाड़ा, संवाददाता: जितेन्द्र दहिया
राजस्थान के जालोर जिले में स्थित सुधा माताजी मंदिर राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु मालवाड़ा से इस मंदिर तक जाने वाले मार्ग से होकर दर्शन करते हैं। लेकिन यह मार्ग अब चर्चा का विषय बन गया है। यह केवल सड़क की हालत का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी, सुरक्षा और नागरिक सुविधा का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय लोगों और यात्रियों के अनुभव यह बताते हैं कि सुधा माताजी मंदिर मार्ग की वर्तमान स्थिति एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। प्रशासन की उदासीनता और विकास के वादों में बड़ा अंतर नजर आता है।
मार्ग की वर्तमान स्थिति
सुधा माताजी मंदिर मार्ग की सड़क इतनी खराब स्थिति में है कि वाहन चालकों को इधर-उधर देखने का अवसर नहीं मिलता। गड्ढे, टूटे हिस्से और उबड़-खाबड़ रास्ते लगातार सुरक्षा और सुविधा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। सड़क की यह खस्ता हालत अनजाने में यात्रियों की मानसिक एकाग्रता बढ़ा रही है। गाड़ी चलाते समय चालक का पूरा ध्यान सड़क पर ही लगाना पड़ता है। हालांकि यह एक व्यंग्य के रूप में फायदे भी पैदा करता है—जैसे तेज गाड़ी नहीं चल सकती, एक्सीडेंट की संभावना कम होती है, और बुजुर्गों की गालियाँ कम सुनाई देती हैं।
यात्रियों और स्थानीय लोगों की समस्या
मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर बुजुर्ग, महिलाएँ, बच्चे और दूर-दराज़ से आने वाले यात्री हर रोज़ इन कठिनाइयों का सामना करते हैं। सड़क की खराब स्थिति उनकी सुविधा और सुरक्षा दोनों के लिए जोखिमपूर्ण साबित हो रही है। स्थानीय लोग कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मार्ग की स्थिति से अवगत करवा चुके हैं। बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हुआ। यह न केवल सड़क की समस्या है, बल्कि यात्रियों के सम्मान और तीर्थ स्थल तक सुरक्षित पहुँच का भी सवाल है।
सड़क की स्थिति के दुष्प्रभाव
गड्ढों और टूटी सड़क के कारण कई दुष्प्रभाव नजर आते हैं। गाड़ी तेज नहीं चल सकती, दुर्घटना की संभावना कम होती है, स्थानीय लोगों की गालियाँ और शिकायतें भी कम सुनाई देती हैं, लेकिन यह सब केवल व्यंग्यात्मक लाभ हैं। असली मुद्दा यह है कि सड़क की यह स्थिति यात्रियों की सुविधा, तीर्थ स्थल की साख और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर प्रश्न खड़ा करती है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस मार्ग से होकर माता के दर्शन करने आते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और सुविधा का ध्यान नहीं रखा गया।
प्रशासन की उदासीनता
चाहे चुनाव का समय हो या सामान्य दिन, इस मार्ग के विकास का मुद्दा केवल वादों तक सीमित रह जाता है। चुनाव में “विकास” के वादे किए जाते हैं और चुनाव के बाद सड़क फिर गड्ढों में खो जाती है। प्रशासन की यह उदासीनता स्थानीय लोगों और तीर्थ यात्रियों के लिए निराशा का कारण बन चुकी है। सुधा माताजी मंदिर मार्ग आज प्रशासनिक उपेक्षा और सरकारी उदासीनता का प्रतीक बन चुका है।
चुनाव और विकास का विरोधाभास
नेताओं और सरकार के विकास वादों और वास्तविक स्थिति में गहरा अंतर नजर आता है। अगर अधिकारी स्वयं इस मार्ग से होकर गुजरें, तो उन्हें कागज़ों में दर्ज विकास और वास्तविक हकीकत का फर्क समझ में आएगा। यह सड़क न केवल तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, विकास की प्राथमिकता और नागरिकों के अधिकारों का प्रतीक भी है।
सुधा माताजी मंदिर मार्ग केवल एक सड़क नहीं है। यह प्रशासनिक उपेक्षा, विकास की अनदेखी और नागरिकों की समस्याओं का जीवंत उदाहरण है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह मार्ग आस्था और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बन सकता है। तीर्थ यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखकर ही प्रशासन को इस मार्ग का सुधार करना चाहिए। यह केवल विकास की आवश्यकता नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की परीक्षा भी है।
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें
राजनीति की हर हलचल, क्रिकेट और स्पोर्ट्स की हर अपडेट, और देश-दुनिया की बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए eNewsBharat के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ना न भूलें।
यहां आपको मिलेंगे लाइव अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज़, शॉर्ट वीडियो, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, मैच प्रीव्यू और रिव्यू
eNewsBharat के साथ जुड़े रहें
देश-विदेश की बड़ी राजनीतिक घटनाएँ, जीएसटी फ्रॉड से जुड़ी अहम जानकारियाँ, स्पोर्ट्स और जनहित से जुड़ी हर ज़रूरी खबर — पल-पल की सटीक जानकारी के लिए eNewsBharat को लगातार विज़िट करते रहें। आपका भरोसा ही हमारी ताकत है। हम आगे भी आपको सबसे तेज़, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबरें पहुँचाते रहेंगे।
अधिक खबरों के लिए पढ़ें –> eNews-bharat
#SudhaMatajiMandirMarg #SadakVikas #YatriSuraksha #BaranNews #RajasthanMandir #SarkariUdasinta #MandirYatra #RoadSafety #LocalSamasya #ElectionAurVikas #BaranSamajSeva #enewsrajasthan #enewsbharat