बारां, संवाददाता: जयप्रकाश शर्मा
बारां में स्व. श्री ओमप्रकाश व्यास मानव सेवार्थ समिति ने सहरिया बालिका जीवन रक्षक सहायता के तहत एक अद्वितीय मानवता का उदाहरण पेश किया। यह घटना समाज में संवेदनशीलता और सामूहिक सहयोग की शक्ति को उजागर करती है। बालिका की जान बचाने के लिए समिति और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर त्वरित कार्रवाई की।
बालिका की गंभीर स्थिति
मांगरोल के समीप स्थित एक गाँव में रहने वाली सहरिया समाज की बालिका का हीमोग्लोबिन मात्र 3 यूनिट था। उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी और बालिका को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन बालिका के पिता ने अंधविश्वास के कारण उसे बिना बताए अस्पताल से ले गए। यह निर्णय बालिका के जीवन के लिए अत्यधिक जोखिमपूर्ण था। स्थिति की गंभीरता को देखकर मांगरोल के समाजहितेषी चिकित्सक डॉ. शकील अहमद ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बालिका को पुनः अस्पताल में भर्ती कर बारां रेफर किया, ताकि उसकी जान बचाई जा सके।
त्वरित मानवीय सहायता
बालिका के बारां पहुँचने पर रात्रि लगभग 11 बजे स्व. श्री ओमप्रकाश व्यास मानव सेवार्थ समिति के सदस्यों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। समिति ने बालिका के उपचार के लिए अस्पताल के प्रबंधन और प्रशासन के साथ संपर्क किया। उनकी तत्परता ने बालिका की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रक्तदान और उपचार प्रक्रिया
समिति ने बारां ब्लड बैंक के माध्यम से तत्काल 1 यूनिट रक्त उपलब्ध कराया। अगले दिन दोपहर 12 बजे अतिरिक्त 1 यूनिट रक्त सुनिश्चित किया गया। समिति ने लगातार बालिका के परिजनों से संपर्क बनाए रखा और उपचार की प्रगति की जानकारी ली। डॉक्टरों और ब्लड बैंक के सहयोग से बालिका का उपचार सफलतापूर्वक जारी रहा। समिति के सदस्यों ने बालिका के जीवन रक्षक प्रयासों में लगातार सहभागिता निभाई और सुनिश्चित किया कि हर जरूरी चिकित्सा सुविधा समय पर मिले।
परिजनों व समाज का सहयोग
बालिका के जीवन रक्षा प्रयास में परिजन, रक्तदाता, ब्लड बैंक और स्थानीय प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाई। समिति ने सभी रक्तदाताओं, डॉक्टरों और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। सामूहिक प्रयास और सहयोग से बालिका की स्थिति में सुधार हुआ और वह खतरे से बाहर आई।
समिति का समर्पित प्रयास
समिति ने यह सुनिश्चित किया कि बारां में बालिका के उपचार की अवधि के दौरान सभी खर्चे समिति द्वारा वहन किए जाएँ। इस कदम से यह संदेश गया कि मानव सेवा और चैरिटेबल प्रयास किसी भी जीवन को बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
जीवन रक्षा में सामूहिक संवेदना की भूमिका
यह घटना स्पष्ट रूप से दिखाती है कि समाज की संवेदनशीलता और सामूहिक सहयोग से असहायों की रक्षा संभव है। बालिका के जीवन को बचाने में सामूहिक प्रयास और त्वरित मानवीय प्रतिक्रिया ने उदाहरण स्थापित किया। सहरिया बालिका जीवन रक्षक सहायता ने यह साबित किया कि सही समय पर किया गया सहयोग किसी भी जीवन को बचा सकता है। यह कहानी मानवता, समाज की जिम्मेदारी और सामूहिक संवेदना का प्रतीक है। बारां की यह घटना हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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