टोंक, संवाददाता: अशोक सैनी
डिग्गी नगरपालिका क्षेत्र में स्थित चरागाह भूमि का उद्देश्य गोवंश को सुरक्षित, स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना था। यह भूमि वर्षों से ग्रामीणों और पशुपालकों के लिए जीवनरेखा रही है। लेकिन आज वही भूमि डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड बनकर प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुकी है। नगरपालिका द्वारा नियमित रूप से शहर का कचरा, प्लास्टिक, गंदगी और सड़ा-गला अपशिष्ट इसी चरागाह में डाला जा रहा है, जिससे इसका मूल स्वरूप पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
कचरा डंपिंग ग्राउंड में तब्दील होती चरागाह भूमि
स्थानीय लोगों के अनुसार डिग्गी चरागाह में रोजाना ट्रैक्टर-ट्रॉली भरकर कचरा डाला जाता है। प्लास्टिक, पॉलीथिन, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट ने पूरे क्षेत्र को ढक लिया है। डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड बनने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि पशुओं के चरने योग्य भूमि भी समाप्त होती जा रही है। चरागाह की जगह अब दुर्गंध और गंदगी का अंबार दिखाई देता है।
गोवंश के जीवन पर मंडराता संकट
चरागाह में रहने को मजबूर गोवंश कचरे के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। चारे की कमी के कारण वे प्लास्टिक और जहरीला कचरा खाने लगते हैं, जिससे गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई गोवंश कमजोरी, पेट की बीमारी और संक्रमण से जूझते हुए दम तोड़ चुके हैं। डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड गोवंश के लिए धीरे-धीरे मौत का मैदान बनता जा रहा है।
मृत गोवंश और आवारा श्वानों का भयावह दृश्य
स्थिति तब और भयावह हो गई जब चरागाह क्षेत्र में कई गोवंश मृत अवस्था में पड़े मिले। मृत पशुओं को समय पर हटाने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते आवारा श्वान खुलेआम मृत गोवंश को नोचते नजर आए। यह दृश्य न केवल अमानवीय है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को भी आहत करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड जल्द ही गोवंश कब्रगाह में बदल जाएगा।
प्रशासन और पशुपालन विभाग की भूमिका
स्थानीय लोगों ने कई बार डिग्गी नगरपालिका और पशुपालन विभाग को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया। लिखित शिकायतें, मौखिक जानकारी और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो कचरा डालना बंद हुआ और न ही गोवंश के इलाज की कोई ठोस व्यवस्था की गई। प्रशासन की यह उदासीनता डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड की समस्या को और गहरा रही है।
आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
चरागाह में फैले कचरे से मच्छर, मक्खियां और अन्य रोग फैलाने वाले कीट तेजी से पनप रहे हैं। आसपास के गांवों और बस्तियों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं। डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड केवल गोवंश ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुका है।
ग्रामीणों की मांग और चेतावनी
ग्रामीणों और गौभक्तों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि: चरागाह में कचरा डालना तुरंत बंद किया जाए, मृत गोवंश के मामलों की जांच हो, दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, गोवंश के लिए चारा, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए, चरागाह भूमि का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए , ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
क्या जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?
डिग्गी का चरागाह केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि गोवंश और ग्रामीण जीवन का आधार है। लेकिन आज डिग्गी चरागाह कचरा डंपिंग ग्राउंड बनकर प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण बन चुका है। अब देखना यह है कि यह खबर भी कचरे के ढेर में दब जाएगी या प्रशासन सच में जागकर कार्रवाई करेगा।
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