धार्मिक नगरी रामदेवरा में कार्तिक माह में लगने वाले मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बाबा रामदेव समाधि समिति और प्रशासन ने लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। समिति ने दर्शनार्थियों के लिए लगभग 1 किलोमीटर लंबी बैरिकेडिंग लगाई है।
फायर ब्रिगेड की विशेष व्यवस्था
आगजनी जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन ने पहली बार आम दिनों में भी फायर ब्रिगेड की गाड़ी तैनात की है। पोकरण के एसडीएम लाखाराम ने बताया कि फायर ब्रिगेड को कार्तिक शुक्ल पक्ष के दौरान रामदेवरा में तैनात किया गया है। इस कदम से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आपातकालीन राहत सुनिश्चित की जा सकेगी।
मेले की शुरुआत और विशेष आयोजन
कार्तिक शुक्ल पक्ष की दूज से मेले की शुरुआत होगी, जो कार्तिक पूर्णिमा तक चलेगा। इस दौरान देश और प्रदेश भर से लाखों श्रद्धालु बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन करेंगे। दूज के अवसर पर समाधि पर श्रवण मुकुट भी स्थापित किया जाएगा।
इस बार मेले में गुजरात से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आने की संभावना है। खासकर कच्छ भुज, अहमदाबाद, भरूच, भावनगर, सूरत और वडोदरा जैसे क्षेत्रों से भक्त बाबा रामदेव के दर्शनों के लिए रामदेवरा पहुंचेंगे।
दर्शन समय और भीड़ प्रबंधन
भीड़ को देखते हुए समिति ने दर्शन का समय बढ़ाया है। रात्रि में समाधि परिसर के पट रात 10 बजे तक खुलेंगे, जबकि सुबह 3:30 बजे अभिषेक आरती के साथ पट खोले जाएंगे। दूज से पहले ही श्रद्धालुओं का रामदेवरा पहुंचना शुरू हो गया है और बुधवार को भारी भीड़ देखी गई।
पुलियों और अतिरिक्त सुरक्षा का इंतजाम
भीड़ प्रबंधन के लिए लाइन के ऊपर अस्थाई पुलियों की व्यवस्था की गई है। इसके जरिए श्रद्धालु मुख्य बाजार से रेलवे स्टेशन की ओर और दूसरी ओर से मुख्य बाजार की ओर आसानी से जा सकेंगे।
पुलिस प्रशासन ने दूज के दिन अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया है। पोकरण के डिप्टी भवानीसिंह ने बताया कि रामदेवरा, भणियाणा, लाठी और पोकरण थानों से पुलिस जाब्ता मौजूद रहेगा। इसके साथ ही आरएसी का जाब्ता भी तैनात रहेगा।

मेले में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा और सुविधाएं
लाखों श्रद्धालुओं के लिए चिकित्सा, पानी और शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। प्रशासन और समिति दोनों मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मेला सुचारू और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो।
रामदेवरा में यह कार्तिक मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी श्रद्धालुओं को एक साथ जोड़ने का मंच प्रदान करता है।





