मकराना,संवाददाता: लक्ष्मण सिंह मैढ़
जांच नहीं हुई तो 10 दिन बाद भूख हड़ताल की चेतावनी
मकराना क्षेत्र की ऐतिहासिक मार्बल खदानों में अवैध खनन और कथित भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया है। भाजपा नेता इकबाल खत्री डैनी के नेतृत्व में स्थानीय खान धारकों और नागरिकों ने उपखंड अधिकारी को राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री, मंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
भू-माफियाओं से मिलीभगत का आरोप
ज्ञापन में खनन अभियंता और खनन कार्यदेशक पर आरोप लगाया गया है कि वे भू-माफियाओं से मिलीभगत कर अवैध खनन को संरक्षण दे रहे हैं। आरोप है कि भारी रिश्वत के बदले नियमों को ताक पर रखकर खनन कराया जा रहा है, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
विश्व प्रसिद्ध खदानें अवैध खनन की चपेट में
ज्ञापन में बताया गया कि मकराना की वही ऐतिहासिक मार्बल खदानें, जहां से ताजमहल और विक्टोरिया मेमोरियल जैसे विश्व प्रसिद्ध स्मारकों के लिए पत्थर गया था, आज अनियंत्रित और अवैध खनन का शिकार बन चुकी हैं। खान धारकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है।
सड़क धंसने से आवागमन ठप, करोड़ों का नुकसान
ग्राम गुणावती से पुराने डाक बंगले की ओर जाने वाली सड़क के नीचे स्थित खदान संख्या 95, 95/ए, 95/बी, 95/196, 96/1, 96/298/1 एवं 98/2 में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किए जाने का आरोप है। इसके कारण सड़क धंस गई और पिछले दो वर्षों से रास्ता पूरी तरह बंद है, जिससे आमजन और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी पहाड़ को खोदने का आरोप
इसी तरह खालसा खदान संख्या 80 के आसपास सरकारी पहाड़ को करीब 80 मीटर गहराई तक खोदने का आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में कहा गया कि इससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है और इस क्षेत्र को ई-ऑक्शन के माध्यम से राजस्व में बदलने की मांग की गई है।
नियमों की अनदेखी और चयनात्मक कार्रवाई
ज्ञापन में कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं—
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खदान संख्या 67 में बिना उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लाइसेंस ट्रांसफर।
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खदान 158 में स्वीकृत क्षेत्र से बाहर अवैध खनन।
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खदान 106/2 को कथित रूप से रिश्वत न देने पर बंद कराना।
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तुरतफुरी माताजी मंदिर के पास खदान 137, 138 और 142 के बीच सरकारी क्षेत्र को ब्लास्टिंग से गिराकर 10–12 करोड़ रुपये का मार्बल निकालने का आरोप।
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खदान 29 में बिना रेक्टिफिकेशन स्कीम और माइंस मैनेजर के असुरक्षित खनन, जिससे बड़े हादसे की आशंका।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि अरावली प्रकरण से जुड़ी खदानों को बंद करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद, रात के समय कथित रूप से रिश्वत लेकर खनन कराया जा रहा है।
10 दिन का अल्टीमेटम
खनन धारकों ने सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों को एपीओ (APO) करने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि 10 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो उपखंड कार्यालय के सामने भूख हड़ताल शुरू की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
खनन अभियंता का पक्ष
वहीं इस मामले में खनन अभियंता ललित मंगल ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि ज्ञापन देने वालों की ही खदान में अवैध खनन पकड़ा गया था, जिसे विभाग ने बंद कराया है। इसी कार्रवाई से नाराज होकर दबाव बनाने के लिए शिकायतें की जा रही हैं।
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