जालौर, संवाददाता: जितेन्द्र दहिया
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मारुवाड़ा, रानीवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। मारुवाड़ा स्कूल में कुल स्वीकृत 23 पदों में लगभग 14 पद रिक्त हैं, जिससे विद्यालय का संचालन वर्तमान में केवल तृतीय श्रेणी कर्मचारियों पर निर्भर है। प्रधानाचार्य और उप प्रधानाचार्य के पद लंबे समय से खाली रहने के कारण मारुवाड़ा स्कूल की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
शिक्षण स्टाफ की अनुपस्थिति
मारुवाड़ा स्कूल में प्रथम श्रेणी के 3 पदों में से 2 पद खाली हैं, जबकि द्वितीय श्रेणी के 5 पदों में सभी रिक्त हैं। लेवल-2 के 3 पदों में 1 पद वर्तमान में खाली है और 31 जनवरी को एक और पद रिक्त हो जाएगा। लेवल-1 के 5 पद भरे हुए हैं, लेकिन केवल इनके सहारे मारुवाड़ा स्कूल को सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो रहा है।
महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक अनुपस्थित
मारुवाड़ा स्कूल में गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे मुख्य विषयों के शिक्षक अनुपस्थित हैं। प्रथम श्रेणी के लेक्चरर के खाली पदों से उच्च कक्षाओं के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
प्रशासनिक और कार्यालयी स्टाफ की स्थिति
मारुवाड़ा स्कूल के कार्यालयी और सहायक स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक है। लिपिक और चपरासी के पद रिक्त हैं। केवल पीटीआई का पद भरा हुआ है। इससे मारुवाड़ा स्कूल का संचालन लगातार समस्याओं से जूझ रहा है। स्थानीय ग्रामीण और अभिभावक मारुवाड़ा स्कूल की स्थिति को लेकर गहरा रोष व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं की गईं, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा के परिणाम दोनों प्रभावित होंगे।
मांग और समाधान
अभिभावकों ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से अपील की है कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की त्वरित नियुक्ति की जाए। मारुवाड़ा स्कूल में रिक्त पदों को तुरंत भरना आवश्यक है ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। स्थानीय लोग चाहते हैं कि मारुवाड़ा स्कूल में प्राथमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों के रिक्त पदों को भरा जाए, साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाए। इससे छात्रों की पढ़ाई में सुधार और बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम सुनिश्चित होंगे। ग्रामीणों का मानना है कि केवल अस्थायी नियुक्ति पर्याप्त नहीं है। मारुवाड़ा स्कूल में स्थायी और नियमित शिक्षक भर्ती, प्रशासनिक निगरानी और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार से ही विद्यालय की बदहाल स्थिति को स्थायी रूप से सुधारा जा सकता है।
मारुवाड़ा स्कूल की शिक्षा और प्रशासनिक स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीण और अभिभावक त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो मारुवाड़ा स्कूल की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
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