नई दिल्ली | भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है। जुलाई–सितंबर 2025 की तिमाही में देश का GDP 8.2% की दमदार रफ्तार से बढ़ा है, जो बीते छह तिमाहियों में सबसे ऊंचा स्तर है। यह प्रदर्शन खास इसलिए है क्योंकि वैश्विक स्तर पर US टैरिफ के कारण दबाव बना हुआ है और घरेलू प्राइवेट इन्वेस्टमेंट भी सुस्त है। इसके बावजूद भारत ने उम्मीद से बेहतर ग्रोथ दर्ज की है। पिछले साल इसी तिमाही में GDP 5.6% था, जबकि अप्रैल–जून में यह 7.8% रहा था।

ग्रामीण मांग, सरकारी खर्च और मैन्युफैक्चरिंग ने दिया बूस्ट
नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत की ग्रोथ तीन प्रमुख तत्वों की वजह से मजबूत रही—ग्रामीण मांग, सरकारी खर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की तेजी। GST रेट कट का पूरा असर अभी सामने आना बाकी है, लेकिन शुरुआती संकेतों से साफ है कि सुधारों का फायदा अर्थव्यवस्था को मिलने लगा है।
लोगों के खर्च बढ़ने से अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज
भारत की GDP में लगभग 60% योगदान प्राइवेट कंजम्प्शन का होता है, यानी आम जनता द्वारा किया गया खर्च। नए फोन खरीदना, बच्चों की फीस जमा करना, वाहन की EMI भरना, किराने का सामान खरीदना—यही मिलकर कंजम्प्शन बनाते हैं।
पिछली तिमाही में लोगों द्वारा किए गए खर्च में बड़ी तेजी देखी गई। जुलाई–सितंबर 2025 में प्राइवेट कंजम्प्शन 6.4% से बढ़कर 7.9% पर पहुंच गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में लोग खर्च करने से कतराते दिखे थे, लेकिन इस बार उपभोक्ता भावनाएं मजबूत रहीं और अर्थव्यवस्था का यह 60% हिस्सा वाला इंजन तेज गति से दौड़ने लगा।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 9.1% पर पहुंची
कंजम्प्शन के अलावा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने भी GDP को मजबूत किया। दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग 9.1% की तेजी दिखाने में सफल रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह केवल 2.2% था।
फैक्ट्रियों में बढ़ते प्रोडक्शन, नए ऑर्डर्स और सप्लाई चेन की स्थिरता ने इस ग्रोथ को और मजबूती दी। यह संकेत है कि भारत का उद्योग क्षेत्र लगातार रिकवरी मोड में है और आने वाले महीनों में यह ट्रेंड बरकरार रह सकता है।
RBI का अनुमान भी पीछे छूट गया
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 1 अक्टूबर को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी मिटिंग में वित्त वर्ष 2025–26 (FY26) के लिए GDP ग्रोथ 6.5% से बढ़ाकर 6.8% किया था। लेकिन दूसरी तिमाही का 8.2% ग्रोथ फिगर RBI की उम्मीदों से भी अधिक है।
यह इशारा करता है कि आने वाले महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत स्थिति में बनी रह सकती है।

GDP क्या है और कैसे काम करती है?
GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद एक ऐसा पैमाना है जिससे किसी देश की आर्थिक हेल्थ का अंदाजा लगाया जाता है। यह देश में तय समय के भीतर प्रोड्यूस हुए सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दर्शाता है।
रियल GDP का कैलकुलेशन स्थिर कीमतों (बेस ईयर 2011–12) पर किया जाता है, जबकि नॉमिनल GDP वर्तमान कीमतों पर कैलकुलेट होती है।
GDP को निम्न फॉर्मूले से निकाला जाता है—
GDP = C + G + I + NX
जहां C = प्राइवेट कंजम्प्शन, G = सरकारी खर्च, I = निवेश और NX = नेट एक्सपोर्ट।
GDP को प्रभावित करने वाले चार प्रमुख इंजन
1. आम जनता का खर्च – जितना अधिक लोग खर्च करते हैं, उतनी ही तेज अर्थव्यवस्था चलती है।
2. प्राइवेट सेक्टर की ग्रोथ – बिजनेस एक्टिविटी GDP में 32% योगदान देती है।
3. सरकारी व्यय – सरकार का खर्च GDP में 11% हिस्सा रखता है।
4. नेट डिमांड – एक्सपोर्ट माइनस इम्पोर्ट; भारत का इम्पोर्ट अधिक होने से इसका योगदान नकारात्मक रहता है।





