नई दिल्ली | रेपो रेट कटौती वह आर्थिक कदम है जिसके तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बैंकों को मिलने वाले कर्ज की ब्याज दर कम कर देता है। जब RBI रेपो रेट कम करता है, तो बैंकों को सस्ते में पैसा मिलता है और वे अपने ग्राहकों को सस्ते लोन ऑफर करते हैं। इस लेख के पहले 10% हिस्से में हम स्पष्ट रूप से समझते हैं कि यह रेपो रेट कटौती आम उपभोक्ता के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।
RBI के 0.25% रेपो रेट कटौती का बड़ा असर
5 दिसंबर को हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में RBI ने रेपो रेट 0.25% घटाकर 5.25% कर दिया। इस घोषणा के बाद आने वाले दिनों में होम, ऑटो और अन्य प्रकार के लोन काफी सस्ते हो जाएंगे। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि यह कदम आर्थिक सुधार, उपभोग बढ़ाने और लोन बोझ को कम करने के लिए उठाया गया है।

EMI पर सीधा लाभ: पूरा गणित
रेपो रेट कटौती के बाद 20 लाख और 30 लाख रुपए के लोन पर EMI में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा:
• 20 लाख के 20 साल के लोन पर EMI में 310 रुपए की कमी
• 30 लाख के लोन पर EMI में 465 रुपए की कमी
कुल मिलाकर, लोग अपने लंबे कार्यकाल वाले लोन में लगभग ₹74,000 तक बचत कर सकते हैं। यह राहत मौजूदा और नए दोनों ग्राहकों को मिलेगी।
रियल एस्टेट सेक्टर में नई रफ्तार
ब्याज दरें कम होने से होम लोन अधिक सस्ते हो जाते हैं और इससे सीधे तौर पर हाउसिंग मार्केट को बूस्ट मिलता है। रेपो रेट कटौती के साथ रियल एस्टेट डिमांड बढ़ने के पूरे संकेत हैं, क्योंकि खरीदार कम EMI और बेहतर ऑफर्स का फायदा उठा पाएंगे। बिल्डर्स और डेवलपर्स के लिए भी यह एक सकारात्मक संकेत है, जिससे नई परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ सकती है।
(Internal Link: enewsbharat.com/business)
इस साल चार बार हुई रेपो रेट कटौती
वित्त वर्ष 2025 में RBI ने लगातार चार बार रेपो रेट घटाकर बाजार को राहत दी:
• फरवरी – 6.5% से 6.25%
• अप्रैल – 0.25% की कटौती
• जून – 0.50% की बड़ी कटौती
• दिसंबर – 0.25% की ताज़ा कटौती
यानी कुल मिलाकर इस साल 1.25% रेपो रेट कटौती की जा चुकी है।
रेपो रेट कम होने पर लोन क्यों सस्ते होते हैं?
बैंक अपनी फंडिंग का बड़ा हिस्सा RBI से प्राप्त करते हैं। रेपो रेट कम होने पर बैंक कम ब्याज पर पैसा लेते हैं। नतीजतन वे होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन और बिज़नेस लोन की ब्याज दरें भी घटा देते हैं। इससे ग्राहकों की EMI घटती है और बाजार में आर्थिक गतिविधि तेज़ होती है।
(External DoFollow Link: https://en.wikipedia.org/wiki/Reserve_Bank_of_India)
RBI महंगाई से लड़ने के लिए रेपो रेट कैसे बदलता है?
RBI महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पॉलिसी रेट का इस्तेमाल करता है।
• महंगाई बढ़े तो रेपो रेट बढ़ाया जाता है
• मंदी या आर्थिक सुस्ती में रेपो रेट घटाया जाता है
रेपो रेट कटौती से बाजार में पैसे का फ्लो बढ़ता है और आर्थिक गतिविधि तेजी पकड़ती है।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी कैसे काम करती है?
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) में कुल 6 सदस्य होते हैं—3 RBI से और 3 केंद्र सरकार के द्वारा नियुक्त। यह समिति हर दो महीने में बैठक करती है और उसके आधार पर नीति दरों का फैसला होता है। नई वित्तीय वर्ष की योजना के अनुसार इस साल कुल 6 बैठकें होंगी, जिनमें रेपो रेट और आर्थिक समीक्षा पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

रेपो रेट कटौती आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
रेपो रेट कटौती सीधे तौर पर लोगों की EMI कम करती है, लोन को आसान बनाती है, घर खरीदने की क्षमता बढ़ाती है और बाज़ार में आर्थिक गति लाती है। RBI का यह निर्णय आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं और रियल एस्टेट उद्योग, दोनों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगा।
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