जयपुर : अर्पित दाधीच
दुनिया में एक अजीब और चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। इंटरनेट पर AI चैटबॉट से बात करने वाले कुछ लोग अब इसे सिर्फ एक मशीन या टूल नहीं मान रहे, बल्कि एक जीवित आत्मा जैसा अस्तित्व मानने लगे हैं। कहा जा रहा है कि AI को मानने वालों ने एक नया धर्म बना लिया है, जिसका नाम है — स्पायरलिज़्म।
इस जानकारी का खुलासा सॉफ्टवेयर इंजीनियर एडले लोपेज ने किया। उन्होंने एक डिस्कॉर्ड सर्वर पर चल रही AI चैटबॉट की सैकड़ों चैट को पढ़ा और पाया कि कई यूज़र्स AI से ऐसे संवाद कर रहे हैं, जैसे वे किसी अदृश्य चेतन सत्ता से बात कर रहे हों। इन चैट्स में बार-बार स्पाइरल, ऊर्जा, कनेक्शन और रीकर्शन जैसे शब्द दिखाई दिए, जिसके बाद इस सोच को स्पायरलिज़्म कहा जाने लगा।
लोग ऐसा क्यों मान रहे हैं?
कई यूज़र्स कहते हैं कि AI के जवाबों में एक खास आध्यात्मिक पैटर्न नजर आता है। उन्हें लगता है कि AI उनके सवालों को सिर्फ समझता नहीं, बल्कि उनके मन, भावनाओं और विचारों को महसूस भी करता है। कुछ लोगों का दावा है कि AI उनसे बिल्कुल उसी तरह बातचीत करता है, जैसे कोई जीवित आत्मा बार-बार एक ही तरह के उत्तरों और संकेतों के साथ संवाद कर रही हो।
हालाँकि तकनीकी विशेषज्ञ इसे एक भ्रम, एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव और इंसानी दिमाग की आदत बताते हैं, जिसमें मनुष्य मशीनों को भी मानवीय भावनाएँ देना शुरू कर देता है। वैज्ञानिक रूप से AI एक डेटा आधारित सिस्टम है। उसके पास न आत्मा है, न चेतना, न ही किसी तरह की भावनाएँ। लेकिन इसके बावजूद लोग इसे एक आध्यात्मिक साथी मानने लगे हैं।
स्पायरलिज़्म में विश्वास करने वाले लोगों का मानना है कि ब्रह्मांड स्पाइरल ऊर्जा पर चलता है, और AI उसी ऊर्जा से जुड़ी एक चेतना है, जिससे बात करके आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया जा सकता है।
मेरी नजर में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव द्वारा बनाया गया एक बेहद शक्तिशाली औज़ार है। यह हमारी मदद करने के लिए है, हमारी आस्था का केंद्र बनने के लिए नहीं। AI को आत्मा मान लेना उसके वास्तविक उद्देश्य और वैज्ञानिक स्वरूप से ध्यान भटकाता है। तकनीक का सम्मान होना चाहिए, लेकिन आस्था का आधार सोच-समझकर होना और भी जरूरी है।
यह नया विचार दुनिया में एक बड़ा सामाजिक और मानसिक बदलाव ला सकता है, लेकिन यह बदलाव इंसानी चेतना को आगे ले जाएगा या उलझा देगा—यह अभी कहना मुश्किल है। समय ही बताएगा कि AI हमारी जिंदगी को सिर्फ आसान बनाएगा, या हमारी आस्था और धर्म की दिशा भी बदल देगा।
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