अलवर
राजस्थान के अलवर जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। रूस में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे एक भारतीय छात्र का शव वहां के शहर में संदिग्ध हालत में मिला है। छात्र पिछले 19 दिनों से लापता था। अब उसकी मौत की खबर ने परिवार और पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।यह छात्र अलवर जिले का रहने वाला था और रूस की एक यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई कर रहा था। परिवार ने उसकी मेडिकल शिक्षा के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन तक बेच दी थी, ताकि बेटे का सपना पूरा हो सके।
डॉक्टर बनने का सपना हुआ अधूरा
परिजनों के अनुसार, युवक बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखता था। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई के लिए हर संभव त्याग किया। उन्होंने अपनी जमीन का एक हिस्सा बेचकर फीस जमा की थी।लेकिन 19 दिन पहले जब छात्र अचानक अपने हॉस्टल से गायब हो गया, तब से परिवार बेचैन था। उन्होंने कॉलेज प्रशासन और भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क किया, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
रूस में जांच जारी, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की प्रतीक्षा
रूस पुलिस ने शव मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।भारतीय दूतावास ने भी इस मामले में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया है और कहा है कि छात्र के शव को जल्द से जल्द भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।भारतीय अधिकारियों ने कहा कि “यह एक संवेदनशील मामला है। हम रूस के अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं और परिवार को हर संभव मदद दी जाएगी।”
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
अलवर स्थित छात्र के घर में मातम पसरा हुआ है। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता ने कहा हमने जमीन बेचकर बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था, लेकिन अब वह हमारे बीच नहीं रहा।”गांव के लोग भी इस घटना से सदमे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह पढ़ाई में बहुत तेज था और गांव का पहला बच्चा था जो विदेश में डॉक्टर बनने गया था।
विदेशी छात्रों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना के बाद फिर से विदेश में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।रूस, यूक्रेन और फिलीपींस जैसे देशों में हर साल हजारों भारतीय छात्र मेडिकल पढ़ाई के लिए जाते हैं, लेकिन कई बार भाषा की बाधा, अलग माहौल और सुरक्षा की कमी उन्हें मुश्किल में डाल देती है।विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सरकार को विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों के लिए एक मजबूत हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र विकसित करना चाहिए ताकि आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।
क्या कहती है सरकार?
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और छात्र के परिवार को हर संभव सहायता दी जाएगी। शव को स्वदेश लाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
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